कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के परिवार के बीच कानूनी लड़ाई जारी है. इस बीच, खेड़ा को अदालत से बड़ी राहत मिली है. गुवाहाटी की एक स्थानीय अदालत ने खेड़ा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करने से इनकार कर दिया है.
दरअसल मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने खेड़ा पर झूठे आरोप लगाने का दावा करते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी. कोर्ट ने इस मामले को लेकर कहा कि पुलिस की मांग सिर्फ 'अनुमानों' पर आधारित है.
कामरूप मेट्रो के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने पुलिस की दलीलों को खारिज करते हुए कहा, गैर-जमानती वारंट जारी करने के लिए जांच अधिकारी (IO) के दिखाए गए आधार पूरी तरह से धारणाओं और अनुमानों पर आधारित हैं.
अदालत ने ये भी कहा कि ये मामला संज्ञेय और गैर-जमानती अपराधों से जुड़ा है. ऐसे में जांच अधिकारी के पास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35 के तहत जांच के लिए गिरफ्तारी करने का अधिकार पहले से ही है, बशर्ते वो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स का पालन करें.
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कोर्ट ने कहा, 'इसे ध्यान में रखते हुए, गैर-जमानती वारंट जारी करने की अपील को मंजूर नहीं किया जा सकता है और इसलिए इस स्तर पर इसे खारिज किया जाता है.'
सीएम सरमा की पत्नी पर 'मल्टीपल पासपोर्ट' के आरोप
5 अप्रैल को नई दिल्ली और गुवाहाटी में पवन खेड़ा ने दो प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इस दौरान खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट, गोल्डन कार्ड और विदेशी संपत्तियां हैं, जिन्हें उनके पति के चुनावी हलफनामे में घोषित नहीं किया गया था.
रिनिकी सरमा ने खेड़ा के इन आरोपों को 'झूठा और बेबुनियाद' बताते हुए 6 अप्रैल को गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज कराया था. उन्होंने दावा किया कि खेड़ा के दिखाए गए दस्तावेज पूरी तरह से नकली और जाली थे.
पवन खेड़ा को शुरुआत में 10 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट से एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिल गई थी. हालांकि, असम सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार की याचिका पर संज्ञान लेते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी.
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अदालत ने खेड़ा को 20 अप्रैल तक गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से भी इनकार कर दिया और उन्हें सलाह दी कि वो अग्रिम जमानत के लिए असम अदालत का दरवाजा खटखटाएं.