बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की रिहाई के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. रिहाई का विरोध करते हुए बिलकिस बानो की वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि वो सदमे से उबर भी नहीं पाई हैं और दोषियों को रिहा कर दिया गया. वकील ने न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि वो (बिलकिस) पुरुषों का सामना करने से डरती हैं. भीड़ या अजनबियों के आसपास नहीं रह सकतीं. सदमे से उबर नहीं पाई हैं.
बिलकिस बानो की वकील शोभा गुप्ता ने सीआरपीसी की धारा 432 का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने ट्रायल जज की राय मांगी थी, जिन्होंने दोषी ठहराया था. दोषी किसी भी तरह की नरमी या छूट के हकदार नहीं हैं. ये बात जांच एजेंसी, सीबीआई ने भी कही थी.
साल 2002 में दंगों के दौरान हुआ था गैंगरेप
बताते चलें कि गुजरात की बिलकिस बानो के साथ साल 2002 में गोधरा दंगों के दौरान गैंगरेप हुआ था. उनके परिवार के 7 लोगों की हत्या भी हुई थी. इस केस में 11 लोग दोषी पाए गए थे. इनको पिछले साल क्षमा नीति के तहत छोड़ दिया गया था. इसपर आपत्ति जताते हुए याचिका दायर की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई थीं कई याचिकाएं
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को नोटिस भेजे थे. कुछ दोषी ऐसे थे, जिनके घर पर ताला लगा था या उनके फोन स्विच ऑफ थे. दोषियों के रिहा होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हुई थीं. गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो की याचिका को छोड़कर बाकी याचिकाओं पर आपत्ति जताई थी.
इससे पहले 18 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को छोड़े जाने पर सवाल उठाए थे. कहा गया था कि फैसला लेने से पहले अपराध की गंभीरता को देखना चाहिए था. बता दें कि गैंगरेप के वक्त 21 साल की बिलकिस बानो 5 महीने की गर्भवती थीं.
उनके परिवार के जिन सात लोगों की हत्या हुई थी, उसमें बिलकिस की तीन साल की बेटी भी शामिल थी. इस केस के 11 दोषियों को 15 अगस्त 2022 को गुजरात सरकार के आदेश पर छोड़ा गया था.