भारत के पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने आजतक के साथ खास बातचीत की है. उन्होंने अपनी एक किताब लिखी है जो अभी तक छपकर नहीं आई. इस किताब को लेकर काफी बवाल मचा हुआ है. कहा जा रहा है कि सरकार ने इस किताब को रोका हुआ है.
इस पर जनरल नरवणे ने खुलकर बात की और बताया कि LAC यानी भारत-चीन सीमा पर क्या हुआ था, सरकार ने सेना को क्या आदेश दिए थे और क्या भारत ने कोई जमीन चीन को दी.
जनरल नरवणे ने रिटायर होने के बाद अपनी यादों पर एक किताब लिखी है. ये किताब उनके निजी अनुभवों और नजरिए पर आधारित है. लेकिन ये किताब अभी तक बाजार में नहीं आई है. इसको लेकर विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने इसे रोका हुआ है या इसमें कुछ ऐसी बातें हैं जो सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए.
जनरल नरवणे ने किताब पर क्या कहा?
जनरल नरवणे ने साफ किया कि इस किताब में उन्होंने सिर्फ अपना निजी नजरिया लिखा है. उन्होंने कहा कि किताब लिखते वक्त उन्होंने कोई भी गुप्त या सरकारी दस्तावेज नहीं देखा. यानी ये किताब पूरी तरह उनकी अपनी यादों और सोच पर आधारित है.
उन्होंने ये भी बताया कि किताब का पब्लिशर यानी प्रकाशक सरकार के संपर्क में है और इस किताब को छापने को लेकर सरकार से बात चल रही है.
LAC पर सेना को क्या आदेश मिला था?
जनरल नरवणे ने बताया कि सरकार ने सेना पर पूरा भरोसा किया. उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से सेना को कहा गया था 'जो ठीक समझो वो करो.' इसका मतलब ये है कि सरकार ने LAC पर चीन से निपटने के लिए सेना को पूरी आजादी दे दी थी. सरकार और सेना के बीच बहुत करीबी तालमेल था.
क्या भारत ने चीन को जमीन दी?
कई लोग ये दावा कर रहे थे कि भारत ने LAC पर अपनी कुछ जमीन चीन को दे दी. जनरल नरवणे ने इस बात को पूरी तरह गलत बताया. उन्होंने कहा कि भारत ने एक इंच भी जमीन नहीं छोड़ी. उनके मुताबिक भारत ने LAC पर हालात को काबू में रखा.
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चीन ने खुद क्या किया?
जनरल नरवणे ने कहा कि पूरी दुनिया ने देखा कि चीन ने अपनी बनाई हुई चौकियां खुद तोड़ीं और पीछे हट गया. यानी उनका कहना है कि आखिर में चीन को ही पीछे हटना पड़ा और भारत की स्थिति मजबूत रही.
सेना और राजनीति पर क्या कहा?
जनरल नरवणे ने कहा कि सेना के मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना पूरी तरह से राजनीति से दूर है, जैसा कि होना भी चाहिए. उन्होंने हमारे पड़ोसी देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सेना राजनीति में दखल देती है, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है.