गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को नफरती भाषण देने से रोकने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई की. मुख्य न्यायाधीश (CJ) विजय बिश्नोई की बेंच ने इस बात पर कड़ा रुख अपनाया कि नोटिस जारी होने के बावजूद राज्य सरकार और पुलिस ने अब तक अपना जवाब क्यों नहीं दाखिल किया. याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि नोटिस मिलने के बाद भी मुख्यमंत्री ने 17 मार्च और 27 मार्च को विवादित टिप्पणियां जारी रखीं.
सिंघवी ने आरोप लगाया कि एक संवैधानिक पद पर बैठे शख्स द्वारा 'मियां' जैसे शब्दों का इस्तेमाल और विशेष समुदायों के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग गंभीर चिंता का विषय है.
उन्होंने अदालत से इन भाषणों पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश की मांग की. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने राज्य के महाधिवक्ता (AG) की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाया और निर्देश दिया कि अगली तारीख तक हर हाल में जवाब दाखिल किया जाए.
'सार्वजनिक रूप से पढ़ा नहीं जा सकता बयान...'
सुनवाई के दौरान जब सिंघवी ने मुख्यमंत्री के बयानों पर रोक लगाने की मांग की, तो मुख्य न्यायाधीश कुमार ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संवेदनशील दिन (चुनाव) अब बीत चुके हैं. हालांकि, सिंघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री विवादित बयान देने के लिए चुनाव जैसे संवेदनशील समय का इंतज़ार नहीं करते.
अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से कहा कि वह मुख्यमंत्री द्वारा की गई टिप्पणियों को सार्वजनिक रूप से पढ़ नहीं सकते, इसलिए उन्होंने एक नोट पेश किया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को इस नोट को आधिकारिक तौर पर हलफनामे के साथ रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति दे दी है.
यह भी पढ़ें: ममता, हिमंता, विजयन और स्टालिन सबकी लड़ाइयां अलग, लेकिन चुनौती एक
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया है. कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई 28 मई को होगी, जिसमें राज्य सरकार के रुख और मुख्यमंत्री के बयानों पर कानूनी गौर किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं ने जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई है.