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उत्तर भारत में हिली धरती... भूकंप आने पर ऐसे करें बचाव, ध्यान रखें ये जरूरी बातें

दिल्ली-NCR में 5.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोग घबरा गए लेकिन किसी नुकसान की खबर नहीं है. दिल्ली भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए NDMA के अनुसार ‘झुको, ढको, पकड़ो’ जैसे नियमों का पालन और पहले से तैयारी बेहद जरूरी है.

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सही तैयारी ही बचाव की सबसे बड़ी कुंजी है (Photo: AI Generated)
सही तैयारी ही बचाव की सबसे बड़ी कुंजी है (Photo: AI Generated)

उत्तर भारत में रात को भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर समेत हरियाणा के भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.9 रही. भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान बॉर्डर पर था. घरों में बैठे लोग डर गए, दुकानदार बाहर भागे, ऑफिस वाले सीढ़ियों की तरफ दौड़े. अभी तक नुकसान की खबर नहीं है, कोई घायल नहीं हुआ है. 

दिल्ली-एनसीआर भूकंप के लिहाज से संवेदनशील इलाके में है. कभी भी तेज झटका आ सकता है. इसलिए पहले से तैयार रहना जरूरी है. तो आइए जानते हैं भूकंप से जुड़ी कुछ अहम बातें. 

भूकंप के दौरान क्या करें?

सबसे पहली और सबसे जरूरी बात है कि घबराना नहीं है. घबराहट में लोग गलत फैसले लेते हैं और ज्यादा चोट खाते हैं. सरकार की आपदा टीम NDMA तीन शब्द सिखाती है: झुको, ढको, पकड़ो.

झुको यानी नीचे बैठ जाएं या लेट जाएं. ढको यानी सिर और गर्दन को हाथों से ढक लें और अगर पास में कोई मजबूत मेज हो तो उसके नीचे घुस जाएं. पकड़े यानी उस मेज को मजबूती से पकड़ लें ताकि वह हिलते-हिलते दूर न चली जाए.

अगर घर के अंदर हैं तो खिड़की, शीशे, टीवी और भारी अलमारी से दूर रहें. रसोई या बाथरूम के कोने में बैठ जाएं. दरवाजे के पास खड़े होने की गलती मत करें. अगर बाहर हैं तो खुली जगह की तरफ जाएं जैसे मैदान या पार्क. इमारतों, पेड़ों, बिजली के खंभों और दीवारों से दूर रहें.

अगर गाड़ी चला रहे हैं हो तो गाड़ी सड़क के किनारे रोको और अंदर ही बैठे रहें. ब्रेक लगाएं और हाथों से सिर को ढक लें. अगर स्कूल या ऑफिस में हैं तो टीचर या बॉस के बताए रास्ते पर चलें. लिफ्ट बिल्कुल मत लें. सीढ़ी से धीरे-धीरे नीचे उतरें.

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पहले से तैयारी करें

घर में एक छोटा बैग तैयार करके रखें. इसमें दो लीटर पानी, बिस्किट या सूखा खाना, दर्द और बुखार की दवाई, टॉर्च, एक्स्ट्रा बैटरी, छोटा रेडियो, कुछ पैसे और जरूरी कागज रखें. यह बैग हमेशा दरवाजे के पास रखें ताकि जरूरत पड़ने पर झटपट उठाया जा सके.

यह भी पढ़ें: भूकंप के तेज झटकों से हिला दिल्ली-NCR, 5.9 की तीव्रता से कांप उठी उत्तर भारत की धरती

घर में जो भारी सामान है, जैसे अलमारी, टीवी, पानी का टैंक, उन्हें मजबूती से दीवार से बांध दें. घर की दीवारों में अगर दरार है तो मिस्त्री से ठीक करवाएं. बच्चों को घर और स्कूल दोनों जगह सिखाएं कि भूकंप आने पर क्या करना है. और पड़ोसियों के साथ मिलकर एक ग्रुप बना लें, ताकि मुसीबत में सब एक-दूसरे के काम आ सकें.

भूकंप के बाद क्या करें?

झटके रुकने के बाद भी एक-दो मिनट रुकें. फिर शांति से बाहर निकलें. गैस का चूल्हा, बिजली का स्विच और पानी की पाइप बंद कर दें. अगर कहीं आग लगी हो तो पहले उसे बुझाएं.

घायल लोगों को देखें. खून निकल रहा हो तो साफ कपड़े से दबाएं. बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को पहले बाहर निकालें. फोन का इस्तेमाल सिर्फ जरूरी काम के लिए करो क्योंकि भूकंप के बाद लाइनें बहुत व्यस्त हो जाती हैं. रेडियो या टीवी से सरकारी जानकारी सुनते रहें.

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दूसरों की मदद कैसे करें

पहले खुद को सुरक्षित करें, उसके बाद दूसरों की तरफ जाएं. पड़ोसी के घर जाएं. बुजुर्ग, बच्चे और अकेले रहने वाले बीमार लोगों को बाहर निकालने में मदद करें. जिसकी हड्डी टूटी लगे उसे हिलाएं मत, बस उसके सिर के नीचे कुछ रखें और पानी पिलाएं.

अगर कोई मलबे में फंसा हो तो खुद अकेले बचाने की कोशिश मत करिए. तुरंत 112 पर फोन करें. बाद में मिलकर पानी बांटें, खाना बांटें और सफाई में हाथ बंटाएं.

मदद मांगें

इमरजेंसी नंबर 112 पर फोन करें और साफ बोलें कि आप कहां हैं और क्या समस्या है. पुलिस के लिए 100, आग के लिए 101 और एम्बुलेंस के लिए 108 पर कॉल करें. फोन न चले तो बाहर निकलकर लोगों को आवाज लगाएं.

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