पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. चिदंबरम ने कहा है कि सरकार को अपनी गलती स्वीकार कर लेनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों पर सरकार ने किसी से भी सलाह नहीं ली. खासकर राज्य सरकारों से बात नहीं की गई.
चिदंबरम ने कहा कि सरकार और किसान संगठनों के बीच वार्ता विफल रही. इसके लिए सरकार को ही दोषी ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि झूठ का पर्दाफाश होने के बाद भी सरकार इन कानूनों को निरस्त नहीं करना चाहती है. गौरतलब है कि चिदंबरम का बयान सरकार और किसानों के बीच 9वें दौर की बातचीत बिना किसी समाधान के समाप्त होने के एक दिन बाद आया है.
कांग्रेस नेता ने कहा कि मौजूदा गतिरोध को समाप्त करने का एकमात्र तरीका यह है कि सरकार अपनी गलती स्वीकार करे और नए तरीके से शुरुआत करे.
सच्चाई यह है कि किसी से भी सलाह नहीं ली गई थी। विशेष रूप से, राज्य सरकारों से परामर्श नहीं किया गया था।
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN)
गतिरोध से बाहर निकलने का एकमात्र तरीका सरकार को अपनी गलती स्वीकार करना और नए सिरें से बात शुरू करने के लिए सहमत होना है।
मालूम हो कि 50 दिन से भी अधिक समय से किसान संगठन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ धरने पर बैठे हैं. उनकी मांग है कि इन कानूनों को निरस्त किया जाए, जबकि सरकार संशोधन की बात कह रही है. ऐसे में अभी तक नए कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध बना हुआ है. शुक्रवार को सरकार और किसान संगठनों के बीच 9वें दौर की बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची. अब सरकार और किसानों के बीच अगली वार्ता 19 जनवरी को होगी.
उधर, सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई कमेटी पर किसान संगठनों ने कहा है कि उन्हें यह कमेटी स्वीकार नहीं नहीं है. जबकि, कृषि मंत्री का कहना है कि किसानों को सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानना चाहिए.