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UAE से भारत लाया गया भगोड़ा कमलेश पारेख, सैकड़ों करोड़ के बैंक घोटाले में था वॉन्टेड

सीबीआई यूएई से कमलेश पारेख को भारत वापस ले आई है. पारेख पर भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के ग्रुप के साथ सैकड़ों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है. अब उससे पूछताछ की जाएगी ताकि बैंकिंग घोटाले की पूरी साजिश का खुलासा हो सके.

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सीबीआई ने रेड नोटिस अपराधी कमलेश पारेख को यूएई से भारत वापस लाने में कामयाबी पाई है. एजेंसी ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ मिलकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया. पारेख पर भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह (कंसोर्टियम) के साथ सैकड़ों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है.

कमलेश पारेख को 1 मई, 2026 को भारत लाया गया. पारेख कंपनी का प्रमोटर और डायरेक्टर था. सीबीआई के मुताबिक, उसने दूसरे निदेशकों के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश के तहत धोखाधड़ी को अंजाम दिया.

पारेख समेत अन्य लोगों ने बैंकों से लिए गए फंड का गलत इस्तेमाल किया. पारेख ने यूएई सहित विदेशों में फैली अपनी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए बैंक के पैसों को इधर-उधर भेजा. इसके बाद वो बैंकों का पैसा लेकर विदेश भाग गया था. लेकिन अब वो कानून के शिकंजे में है.

फ्रॉड के जरिए बैंकों को नुकसान पहुंचाने का आरोप

पारेख पर धोखाधड़ी से वित्तीय लेनदेन में हेरफेर करने और बैंकिंग माध्यमों का गलत इस्तेमाल करके बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप है. ऐसे में उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड नोटिस जारी किया था. इसी नोटिस के आधार पर उसकी लोकेशन यूएई में ट्रैक की गई. भारत सरकार के अनुरोध पर यूएई के अधिकारियों ने उसे वहां हिरासत में ले लिया. 

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सीबीआई की गिरफ्त में पारेख

यूएई और भारत की सुरक्षा एजेंसियों और कानूनी विभागों ने मिलकर काम किया. कानूनी कार्यवाही पूरी होने के बाद यूएई ने उसे भारतीय अधिकारियों को सौंपने का फैसला किया. 1 मई, 2026 को पारेख दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचा. यहां पहुंचते ही सीबीआई, बीएसएफबी (BfSB), कोलकाता की टीम ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया. अब उससे विस्तार से पूछताछ की जाएगी ताकि इस बड़े बैंकिंग घोटाले की परतों को खोला जा सके.

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