वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश की आर्थिक प्रगति के रोडमैप पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत गति देने के लिए प्रतिबद्ध है और सरकार का मुख्य फोकस संरचनात्मक सुधारों के जरिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने पर है, जिससे उत्पादकता बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा.
बजट के बाद वित्त मंत्रालय ने बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और मंत्रालय के सभी सचिव मौजूद थे. प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी ने स्पष्ट किया कि सरकार संरचनात्मक सुधारों के जरिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर रही है. कई सुधार पहले किए जा चुके हैं, लेकिन ये प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी. इसका मुख्य उद्देश्य देश में उत्पादकता बढ़ाने और रोजगार सृजन सुनिश्चित करने के लिए माहौल बनाना है.
कृषि क्षेत्र में बढ़ेगी उत्पादकता
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी पूरी तरह से प्रौद्योगिकी से चल रही है. हम सुनिश्चित करेंगे कि प्रौद्योगिकी आम आदमी के लाभ के लिए लाई जाए, ताकि आम आदमी की ईज ऑफ लिविंग, व्यवसाय, किसानों की उत्पादकता और बेहतर लॉजिस्टिक्स में फायदा हो.
वित्त मंत्री ने शहरों को भारत के विकास, इनोवेशन और अवसरों का इंजन करार दिया. उन्होंने कहा कि अब सरकार टियर-2 और टियर-3 शहरों, यहां तक की मंदिरों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है. जहां आधुनिक बुनियादी ढांचे और बुनियादी सुविधाओं की सख्त जरूरत है. सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER) के तहत पांच सालों में प्रति क्षेत्र 5000 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा गया है.
सेमीकंडक्टर मिशन को लेकर बड़ा ऐलान
वित्त मंत्री ने बजट के दो महत्वपूर्ण पहलुओं का जिक्र करते हुए सेमीकंडक्टर मिशन और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बजट में सेमीकंडक्टर मिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को लेकर दो बड़ी घोषणाएं की गई हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के निर्माण के लिए 40,000 करोड़ रुपये की योजना का प्रावधान किया गया है जो इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है.
रेयर अर्थ कॉरिडोर का होगा निर्माण
इसके अलावा भारत ने 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' (Rare Earth Corridors) स्थापित करने का फैसला लिया है, ताकि विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सके. ये गलियारे ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में स्थापित किए जाएंगे, जिनका भारतीय अर्थव्यवस्था पर दशकों तक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए गैर-ऋण प्राप्तियां 36.5 लाख करोड़ रुपये और कुल खर्च 53.5 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है. केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है. सरकार का सकल बाजार उधार 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है.
वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष के संशोधित अनुमानों की तुलना में इस बार पूंजीगत व्यय को लगभग 11 लाख करोड़ रुपये पर रखा गया है जो बुनियादी ढांचे के निर्माण के प्रति सरकार की गंभीरता को दिखाता है.
वहीं, अर्थव्यवस्था की सेहत को सुदृढ़ रखने के लिए राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है. साल 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो पिछले वर्ष के 4.4 प्रतिशत से कम है.
इसी तरह कर्ज-जीडीपी अनुपात (Debt-to-GDP ratio) भी सुधरा है और इसके 56.1 प्रतिशत से घटकर 55.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है.