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सम्राट के शपथ ग्रहण में 'वंदे मातरम्' के साथ न्याय... बिहार लोकभवन में गाये गए काटे गए चार पैराग्राफ

बिहार के लोकभवन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह में पूरा वंदे मातरम् छह छंदों के साथ गाया गया. फरवरी 2026 में सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को अनिवार्य किया था.

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सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में गाया गया पूरा वंदे मातरम्
सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में गाया गया पूरा वंदे मातरम्

बिहार में सत्ता परिवर्तन की सुबह एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला. सम्राट चौधरी के सीएम पद के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत वंदे मातरम् से हुई. इस दौरान पूरा वंदे मातरम् गाया गया. इसके चार पैराग्राफ जो पहले सरकारी कार्यक्रमों में नहीं गाये जाते थे उन्हें भी गाया गया.

बिहार को लोकभवन में यह शपथ ग्रहण कार्यक्रम रखा गया था. इस दौरान जब राज्यपाल आए और फिर समारोह की औपचारिक शुरुआत हुई तो पहले वंदे मातरम् गाया गया. 

अभी तक वंदे मातरम् के सिर्फ शुरुआती दो पैराग्राफ ही गाए जाते थे. इसे बाद के चार पैराग्राफ को नहीं गाया जाता था और उन्हें विवादित हिस्सा माना जाता था. हाल ही में संसद में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा हुई थी. 

फरवरी 2026 में अनिवार्य किया गया था वंदे मातरम्
फरवरी 2026 में ही सरकार ने आधिकारिक मौकों पर वंदे मातरम् के छह अंतरा वाले संस्करण को बजाना या गाना अनिवार्य किया था. इस तरह पूरा वंदे मातरम् गीत गाने में कुल अवधि 3 मिनट और 10 सेकंड की होती है. यह नियम राष्ट्रीय ध्वज फहराने, कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन, उनके भाषणों या राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद के लिए लागू है.

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इसके साथ ही, राज्यों के राज्यपालों के आगमन और उनके भाषणों से पहले और बाद में भी इसी निर्धारित अवधि और संस्करण का पालन करना जरूरी किया गया था. सरकार के इस आदेश का मकसद आधिकारिक प्रोटोकॉल के तहत राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसकी प्रस्तुति में एकरूपता सुनिश्चित करना है. अब सभी सरकारी कार्यक्रमों में निर्धारित समय सीमा के अंदर ही इस गीत का गायन या वादन किया जाएगा.  

पहली बार किसी प्रदेश के सरकारी कार्यक्रम में गाया गया वंदे मातरम्
इसी अनिवार्यता के चलते बिहार के लोकभवन में जब शपथ ग्रहण कार्यक्रम की शुरुआत हुई तब राज्यपाल के आने के बाद पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम् अपने संपूर्ण छह छंदों के साथ गाया गया, इसके बाद बैंड की धुन पर राष्ट्रगान भी गाया गया. इसके बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई. आजादी के बाद किसी प्रदेश के सरकारी कार्यक्रम में ये पहला मौका रहा जब वंदे मातरम् पूरा गाया गया है.

वंदे मातरम् का इतिहास

वंदे मातरम् गीत बंकिम चंद्र चटर्जी ने बहुत ज़्यादा संस्कृत वाली बंगाली भाषा में लिखा था. इसे 7 नवंबर 1875 को बंगदर्शन जर्नल में छापा था. बाद में यह उनके नॉवेल आनंदमठ (1882) में छपा. जो मातृभूमि के लिए एक साहित्यिक गीत के तौर पर शुरू हुआ. आगे चलकर यह भारत के आज़ादी के संघर्ष की धड़कन बन गया.

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वंदे मातरम् को हुए 150 साल
एक ऐसा गीत जिसे सैनिक लड़ाई से पहले फुसफुसाते थे और छात्र विरोध के तौर पर गाते थे. भारत का राष्ट्रीय गीत, वंदे मातरम, जिसका मतलब है मैं तुम्हें नमन करता हूं मां. इस गीत को 150 साल हो चुके हैं. संस्कृत वाली बंगाली भाषा में लिखे गए इस गीत ने भारत को हरियाली और भरपूरता से ढकी एक पालन-पोषण करने वाली मां के रूप में दिखाया.

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