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'हम अल्लाह के सिवा किसी...', बेंगलुरु के चीफ इमाम को 'वंदे मातरम्' पर एतराज, सरकार से आदेश वापसी की मांग

Vande Mataram Row: बेंगलुरु की जामिया मस्जिद के चीफ इमाम की ओर से आए इस बयान ने 'वंदे मातरम' के अनिवार्य गायन वाले सरकारी आदेश को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. मौलाना इमरान मकसूद ने धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए इस आदेश पर अपनी असहमति दर्ज कराई है.

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बेंगलुरु के चीफ इमाम ने 'वंदे मातरम्' पर जताई आपत्ति.(Photo:Screengrab)
बेंगलुरु के चीफ इमाम ने 'वंदे मातरम्' पर जताई आपत्ति.(Photo:Screengrab)

बेंगलुरु की जामिया मस्जिद के चीफ इमाम मौलाना इमरान मकसूद ने सभी स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम् गाना जरूरी करने वाले सरकारी ऑर्डर पर एतराज जताया है.

एक बयान में मौलवी ने कहा कि मुस्लिम कम्युनिटी नेशनल एंथम (जन गण मन) का बहुत सम्मान करती है और उसकी इज्जत बनाए रखती है, लेकिन वंदे मातरम को लेकर उन्हें कुछ दिक्कतें हैं. 

उन्होंने बताया कि गाने में कुछ लाइनें देवी दुर्गा की पूजा का जिक्र करती हैं, जो इस्लामिक मान्यताओं के खिलाफ है, क्योंकि इस्लाम सिर्फ अल्लाह की पूजा की इजाजत देता है.

मौलाना ने कहा, ''हमारे देश के हुक्मरानों ने ऑर्डर जारी कर हर स्कूल और मदरसे में वंदे मातरम् गाना जरूरी कर दिया है. हम अपने देश के नेशनल एंथम का पूरा सम्मान करते हैं और इसकी इज्जत बनाए रखते हैं. लेकिन हमें वंदे मातरम् को लेकर एतराज है, क्योंकि इसमें देवी दुर्गा की पूजा से जुड़ी कुछ लाइनें हैं.

आप जानते हैं कि हम अल्लाह के अलावा किसी और की पूजा नहीं कर सकते. ऐसे में हमारे लिए इसे गाना सही नहीं है. हमारे हिंदू भाई इसे गा सकते हैं; हमें इस पर कोई एतराज नहीं है. लेकिन हम मुसलमान इसे नहीं पढ़ सकते. इसलिए, हम सरकार से रिक्वेस्ट करते हैं कि वह यह ऑर्डर वापस ले.''

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