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क्या दिल्ली में समय से पहले हो पाएगा विधानसभा चुनाव? मोदी सरकार के पाले में होगी गेंद

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने इस्तीफे की घोषणा के साथ ही दिल्ली में राजनीतिक हलचल मचा दी है. दिल्ली विधानसभा के चुनाव अगले साल होने हैं, लेकिन केजरीवाल ने उससे पहले ही चुनाव कराने की मांग आयोग से की है. उन्होंने अपील की है कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव महाराष्ट्र के साथ नवंबर में कराए जाएं, लेकिन इस पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को लेना है.

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पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. (Photo: PTI)
पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. (Photo: PTI)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने दो दिनों के भीतर इस्तीफा देने की घोषणा की है, साथ ही समय से पहले विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि जब तक जनता फैसला नहीं सुना देती कि केजरीवाल ईमानदार है, तब तक वे मुख्यमंत्री पद पर नहीं बैठेंगे. दिल्ली में फरवरी 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन केजरीवाल ने मांग की है कि नवंबर में चुनाव कराए जाएं. 

केजरीवाल की यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिल्ली सरकार का कार्यकाल अभी करीब छह महीने बचा है. वहीं केजरीवाल ने चुनाव आयोग से अपील की है कि दिल्ली में महाराष्ट्र और झारखंड के साथ नवंबर में ही चुनाव कराए जाएं. हालांकि इसका अंतिम फैसला चुनाव आयोग और मोदी सरकार के हाथ में है, जो इस पर विचार करेगी कि क्या चुनाव की तारीखें बदली जा सकती हैं.

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दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी नवंबर में चुनाव कराकर दिखाए. दिल्ली में अभी वोटिंग लिस्ट रिवाइज हो रही है, यह प्रक्रिया 18 अक्टूबर तक चलनी है. ऐसे में कैसे नवंबर में दिल्ली में चुनाव हो सकता है? इस पर आतिशी ने कहा कि इलेक्शन कमीशन चाहे तो आज चुनाव की घोषणा कर दे. आतिशी ने कहा कि हिम्मत है तो केंद्र सरकार महाराष्ट्र और झारखंड के साथ चुनाव करवा ले. जनता फैसला करेगी कि केजरीवाल ईमानदार है या नहीं. दिल्ली की जनता फैसला करेगी.

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उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने दिल्ली के बजट को 30 हजार करोड़ से 75 हजार पहुंचा दिया है. एक रुपये का भ्रष्टाचार नहीं किया. आम आदमी पार्टी अपनी ईमानदारी से कभी कंप्रोमाइज नहीं कर सकती है. दिल्ली के लोगों को आम आदमी पार्टी पर भरोसा है.

मोदी सरकार अब इस मामले में अहम भूमिका होगी. हालांकि चुनाव आयोग इस पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन केंद्र के साथ परामर्श ले सकता है. दिल्ली का चुनाव पहले कराने के लिए कई कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों पर विचार करना होगा, जिसमें मौजूदा विधानसभा की मियाद और चुनाव के लिए जरूरी तैयारियां शामिल हैं.

इस्तीफे के बाद केजरीवाल का अगला कदम क्या होगा?

केजरीवाल ने साफ किया है कि वे अपनी पार्टी के विधायक दल की बैठक में नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू करेंगे. हालांकि, आम आदमी पार्टी ने इस पर कोई स्पष्ट नाम नहीं दिया है. केजरीवाल और मनीष सिसोदिया कोई जिम्मेदारी नहीं लेंगे. केजरीवाल ने कहा है कि वे दोनों जनता के बीच जाएंगे. जनता ही फैसला करेगी.

चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को लेना होगा फैसला

केजरीवाल के इस्तीफे और चुनाव की मांग से राजनीतिक माहौल गरमा गया है. केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को मिलकर तय करना होगा कि क्या दिल्ली में समय से पहले चुनाव हो सकते हैं. केजरीवाल के इस्तीफे और समय से पहले चुनाव की मांग ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है. देखना होगा कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार क्या फैसला लेते हैं. क्या केजरीवाल की यह मांग पूरी होगी, या दिल्ली चुनाव अपने तय समय पर फरवरी 2024 में ही होंगे?

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फरवरी 2025 में होने हैं विधानसभा चुनाव

आम आदमी पार्टी साल 2013 से दिल्ली की सत्ता पर काबिज है. दिल्ली में फरवरी 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं. साल 2013 में दिल्ली की 70 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे 8 दिसंबर 2013 को आए थे. इसमें भाजपा 32 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. हालांकि, बहुमत नहीं मिला.

उस समय हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी को 28 और कांग्रेस को 8 सीटें मिलीं थीं. कांग्रेस के समर्थन से अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बनते हुए सरकार बनाई थीं. हालांकि 49 दिन बाद दोनों पार्टियों का गठबंधन टूट गया. केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद जब विधानसभा के चुनाव हुए तो केजरीवाल की पार्टी ने अकेले बहुमत हासिल किया था.

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