प्लेन क्रैश में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन की खबर से माहौल गमगीन है. विमान हादसे में अजित पवार की दुर्भाग्यपूर्ण और असामयिक मौत ने न सिर्मृफ बीजेपी की अगुवाई वाली राज्य सरकार में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है, बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के भविष्य पर भी सवाल उठा दिए हैं.
इस स्थिति पर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी एक गंभीर नेतृत्व संकट का सामना कर सकती है, क्योंकि पार्टी में कोई स्पष्ट सेकेंड इन कमांड मौजूद नहीं है. पार्टी अपने सबसे लोकप्रिय नेता को खो चुका है और ऐसे में पार्टी के अस्तित्व, उसकी दिशा और संस्थापक शरद पवार के साथ भविष्य के समीकरणों पर सवाल खड़े हो गए. वहीं, शरद पवार का राज्यसभा कार्यकाल इस साल अप्रैल में समाप्त हो रहा है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि अजित पवार के साथ जुड़े 41 विधायक शरद पवार के खेमे की ओर वापस न लौट जाएं. अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार इस समय राज्यसभा सांसद हैं और राजनीतिक रूप से सक्रिय भी रही हैं, लेकिन उनके पास प्रशासनिक अनुभव की कमी मानी जाती है.
मौजूदा समय में एनसीपी के पास लोकसभा में एक सांसद सुनील तटकरे और राज्यसभा में दो सांसद प्रफुल्ल पटेल और सुनेत्रा पवार हैं. हाल ही में हुए स्थानीय निकाय और नगर निकाय चुनावों के दौरान एनसीपी संस्थापक शरद पवार सार्वजनिक मंचों से दूर रहे. उनकी बेटी और एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने पार्टी के लिए प्रचार किया, लेकिन वे अपने चचेरे भाई अजित पवार के व्यापक राज्यव्यापी प्रचार का मुकाबला नहीं कर सकीं.
राज्य की राजनीति में एनसीपी (एसपी) और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के संभावित विलय को लेकर चर्चाएं थीं लेकिन विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद उनके गुट का भविष्य अनिश्चितता में घिर गया है.
एनसीपी के राज्य अध्यक्ष सुनील तटकरे और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के अलावा पार्टी में ऐसा कोई वरिष्ठ नेता नहीं दिखता जो अजित पवार की जगह ले सके. एकमात्र अन्य जनाधार वाले नेता छगन भुजबल जिन्हें हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बरी किया गया है लेकिन वे इस समय अस्वस्थ हैं.
हालांकि, पटेल और तटकरे संगठनात्मक स्तर पर अहम भूमिका निभाते रहे हैं, लेकिन उनके पास वह राज्यव्यापी जनसंपर्क और राजनीतिक पकड़ नहीं है, जो अजित पवार के पास थी. 2024 के विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत से जीत हासिल करने वाले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में भाजपा के 132 विधायक हैं, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 57 और अजित पवार की एनसीपी के 41 विधायक हैं.
वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश अकोलकर ने कहा कि दोनों एनसीपी गुट 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनाव ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न पर मिलकर लड़ रहे हैं, जो एक तरह से अनौपचारिक विलय का संकेत है. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह नहीं रह गया है कि कौन किसमें विलय करेगा. विपक्ष में केवल दो ही दल बचे हैं, कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी). देखना यह है कि क्या कांग्रेस खुद को फिर से खड़ा कर पाती है या नहीं.
हाल में संपन्न महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में एनसीपी ने महायुति सहयोगियों से अलग होकर चुनाव लड़ा और 29 नगर निगमों में कुल 167 सीटें जीतीं. हालांकि, पार्टी को अपने गढ़ पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में भाजपा से करारी हार का सामना करना पड़ा, जहां उसने शरद पवार की एनसीपी (एसपी) के साथ गठबंधन किया था. एनसीपी (एसपी) पूरे राज्य में सिर्फ 36 सीटें जीत पाई.
165 सदस्यीय पुणे नगर निगम में एनसीपी को केवल 27 सीटें और एनसीपी (एसपी) को 3 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा ने 119 सीटों पर कब्जा किया. वहीं, 102 सदस्यीय पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम में अजित पवार की पार्टी को 37 सीटें मिलीं, शरद पवार का गुट एक भी सीट नहीं जीत सका और भाजपा ने 84 सीटें हासिल कीं. पिछले महीने 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के चुनावों में कुल 6,851 सीटों में से एनसीपी ने 966 और एनसीपी (एसपी) ने 256 सीटें जीतीं.