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Agniveer Training: नेवी चीफ ने बताया- 22 हफ्ते की ट्रेनिंग से तैयार होंगे अग्निवीर

Agnipath Scheme के तहत अग्निवीरों की ट्रेनिंग कैसे होगी? सबसे बड़ा सवाल इस पर उठ रहा है, क्योंकि उनकी ट्रेनिंग का समय बेहद कम है. नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने बताया कि किस तरह से इन योद्धाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा.

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Agniveer Training: नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने बताया कि ये ट्रेनिंग जवान का जीवन बदल देगी. (फोटोः गेटी) Agniveer Training: नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने बताया कि ये ट्रेनिंग जवान का जीवन बदल देगी. (फोटोः गेटी)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अग्निवीरों को मिल रहा है देश और सेना की सेवा का मौका
  • कुल 22 हफ्ते की ट्रेनिंग होगी, 5 हफ्ते बाद फिर प्रशिक्षण

केंद्र सरकार ने अग्निपथ स्कीम (Agnipath Scheme) के तहत अग्निवीरों (Agniveer) को भारतीय मिलिट्री के तीनों अंगों में भर्ती करने का फैसला किया है. फैसले का काफी विरोध भी हो रहा है. सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा था कि अग्निवीरों की ट्रेनिंग कैसे होगी? इससे किस तरह का फायदा जवानों को होगा, कैसा फायदा सेना को होगा. India Today ग्रुप के एडिटोरियल डायरेक्टर राहुल कंवल से एक्सक्लूसिव बातचीत में भारतीय नौसेना (Indian Navy) के प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने इन सवालों के जवाब दिए. 

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने कहा कि अग्निपथ स्कीम (Agnipath Scheme) काफी बदलाव वाली योजना है. अब हम पहले की तुलना में ज्यादा 3 से 4 बार ज्यादा भर्तिया कर सकेंगे. जवानों की पर्सनैलिटी डेवलप होगी. चार साल की सेवा के बाद वो फैसला कर पाएंगे कि उन्हें सेना में रहना है या नहीं. 

अग्निपथ स्कीम के तहत अग्निवीरों की पर्सनैलिटी में सुधार आएगा. उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा. (फोटोः गेटी)
अग्निपथ स्कीम के तहत अग्निवीरों की पर्सनैलिटी में सुधार आएगा. उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा. (फोटोः गेटी)

चार साल के बाद रोजगार की दिक्कत नहीं होगी

एडमिरल आर. हरि कुमार से जब पूछा गया कि चार साल के बाद अग्निवीर (Agniveer) क्या करेंगे? इसके जवाब में नौसेना प्रमुख ने कहा कि सेना में भर्ती सिर्फ नौकरी का मौका नहीं है. यह देश की सेवा है. आपको देश के लिए योगदान देना होता है. जो युवा इसमें चयन किए जाएंगे उन्हें चार साल के बाद भी फायदा होगा. 

नौसेना प्रमुख का कहना है कि इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य है देश में राष्ट्रवादी लोकाचार को विकसित करना. समुदायों और सेना के बीच के संबंध को ज्यादा मजबूत बनाना. आपके पास चार साल के बाद भी कई तरह के विकल्प रहेंगे, जिन्हें आप अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए कर सकते हैं. 

चार साल के बाद कई राज्यों, मंत्रालयों और उद्योग जगत के लीडर्स ने अग्निवीरों को नौकरी देने का वादा किया है. (फोटोः गेटी)
चार साल के बाद कई राज्यों, मंत्रालयों और उद्योग जगत के लीडर्स ने अग्निवीरों को नौकरी देने का वादा किया है. (फोटोः गेटी)

जो देश सेवा करना चाहता है, उसके लिए रास्ते खुले हैं

25 फीसदी लोगों को सेना में रखा जाएगा और बाकी 75 फीसदी को वापस भेज दिया जाएगा? इस सवाल पर एडमिरल आर. हरि कुमार ने कहा कि हम एक पारदर्शी प्रक्रिया रखना चाहते हैं. कोई जवान कैसा प्रदर्शन करता है, उसका व्यवहार कैसा है, वह देश की और सेना की सेवा करना चाहता है या नहीं. हम यह सब देखेंगे. अग्निवीरों के पास इस बात का विकल्प रहेगा कि वो देश सेवा के लिए सेना में वॉलंटियर करना चाहता है या फिर बाहर जाना चाहता है. विकल्प होना हमेशा ही एक बेहतर बात रही है. 

अग्निपथ स्कीम को आर्थिक बिंदु से नहीं देखना चाहिए.

अग्निवीर के मुद्दे पर ये भी सवाल उठ रहे हैं पेंशन और वन रैंक वन पेंशन में कटौती की जा रही है. इस पर एडमिरल ने कहा कि रक्षामंत्री ने स्पष्ट कर दिया था कि हमें इस मुद्दे को आर्थिक बिंदु से नहीं देखना चाहिए. पैसा किसी तरह से कोई दिक्कत नहीं है. हमें अत्याधुनिक सैनिक तैयार करने हैं. जो AI और नई तकनीकों आदि से वाकिफ हों. 

इमरजेंसी की हालत में अगर सेना को जरूरत होगी तो अग्निवीरों को फिर से बुलाया जाएगा. (फोटोः गेटी)
इमरजेंसी की हालत में अगर सेना को जरूरत होगी तो अग्निवीरों को फिर से बुलाया जाएगा. (फोटोः गेटी)

क्या पायलट प्रोजेक्ट बेहतर विकल्प होता? इस सवाल के जवाब में एडमिरल आर. हरि कुमार ने कहा कि हमारे पास कई तरह के विकल्प हैं. अगर आप पायलट प्रोजेक्ट शुरु करते हैं तो आपके पास तुरंत फौज में दो तरह के वर्ग पैदा हो जाते हैं. इसमें वरिष्ठता और सैलरी आदि का मुद्दा उठता है. इसलिए हमें इस पर आगे बढ़ना था. 

कई राज्यों, मंत्रालयों ने 4 साल बाद नौकरी देने का वादा किया है

CAPF क्या बेहतर विकल्प है. इस पर नौसेना प्रमुख ने कहा कि हम एकदम अलग पद्धति से काम करते हैं. हमारी असीमित जिम्मेदारियां हैं, जो हमें प्रोफेशनली एकदूसरे से अलग बनाती है. जिसे भी अग्निपथ स्कीम (Agnipath Scheme) के तहत अग्निवीर बनना है, वो खुद से प्रेरित होकर आए. कई राज्यों, मंत्रालयों और उद्योग जगत के लीडर्स ने अग्निवीरों के लिए कई तरह की घोषणाएं की हैं. 

चार साल के बाद बेरोजगारी का मुद्दा? इस पर एडमिरल कुमार ने कहा कि 80 हजार से एक लाख सेना के जवान रिटायरमेंट के बाद अलग-अलग जगहों पर नौकरी कर रहे हैं. इमरजेंसी की हालत में इन्हें वापस भी बुलाया जा सकता है. इस बीच, रूस और यूक्रेन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वहां जो हुआ उसे लेकर कोई भी निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी. ये कोई खबर नहीं है. ऐसे हालात कई देशों में हैं. हमारे पास इस तरह की भर्तियों का इतिहास रहा है. 

नौसेना प्रमुख ने कहा कि देश की सेवा का मौका मिला है, जो वॉलंटियर करेगा...वो आगे बढ़ेगा. (फोटोः गेटी)
नौसेना प्रमुख ने कहा कि देश की सेवा का मौका मिला है, जो वॉलंटियर करेगा...वो आगे बढ़ेगा. (फोटोः गेटी)

22 हफ्ते की शुरुआती ट्रेनिंग, पांच हफ्ते बाद फिर होगा प्रशिक्षण

अग्निवीरों की ट्रेनिंग पर एडमिरल आर. हरि कुमार ने कहा कि इनकी 20 हफ्ते की सामान्य ट्रेनिंग होगी. इसके अलावा दो हफ्ते की अलग से ट्रेनिंग कराई जाएगी. कुल मिलाकर 22 हफ्ते की ट्रेनिंग होगी. इसके बाद उसे सीधे सेना में पोस्टिंग दी जाएगी. इसके बाद की ट्रेनिंग पांच हफ्ते बाद दी जाएगी. 

भारत के युवाओं के लिए कोई संदेश देना चाहेंगे. इस पर नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने कहा कि अग्निपथ स्कीम (Agnipath Scheme) बड़े बदलाव वाली स्कीम है. यह हर युवा को देश सेवा का मौका देगा. हमारे साथ युवा आएं, हमारे साथ काम करें. खुद को बेहतर बनाएं. स्किल्स सीखें. आत्मविश्वास हासिल करें. बेहतरीन मौके पाएंगे और अच्छा जीवन भी. यह एक शानदार योजना है. इसमें किसी को भी परेशान होने के लिए कोई बिंदु नहीं है. 

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