मुंबई के वर्ली डोम में आयोजित हाई-प्रोफाइल राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिला. पार्टी ने सर्वसम्मति से सुनेत्रा अजित पवार को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया. यह फैसला पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल द्वारा उनके नाम का प्रस्ताव रखे जाने के बाद अंतिम रूप से पारित किया गया.
बैठक ऐसे समय में बुलाई गई थी जब पार्टी दिवंगत नेता अजित पवार के निधन के बाद नेतृत्व के संकट और संगठनात्मक अस्थिरता से जूझ रही थी. प्रफुल्ल पटेल ने अपने प्रस्ताव में कहा कि मौजूदा चुनौतीपूर्ण दौर में पार्टी को एकजुट और संवेदनशील नेतृत्व की जरूरत है, जो कार्यकर्ताओं को दिशा दे सके.
इसके अलावा बैठक के दौरान एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि पार्थ पवार को एनसीपी की ओर से राज्यसभा के लिए आधिकारिक उम्मीदवार नामित किया गया है. इसे पार्टी में नई पीढ़ी को शीर्ष विधायी मंच पर स्थान देने की रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने भावुक भाषण दिया. उन्होंने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन पार्टी नेतृत्व भविष्य को लेकर अपनी सोच में पूरी तरह एकजुट रहा.
पटेल ने खुद को पार्टी का संस्थापक सदस्य और 35 से अधिक वर्षों तक अजित पवार के करीबी सहयोगी बताते हुए शीर्ष पद के लिए औपचारिक रूप से सुनेत्रा पवार के नाम का प्रस्ताव रखा. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अधिवेशन खास तौर पर नेतृत्व परिवर्तन को सुचारु बनाने और पार्टी को एकजुट बनाए रखने के लिए बुलाया गया था.
अजित पवार को दी श्रद्धांजलि
इस प्रस्ताव को मौजूद सभी नेताओं और प्रतिनिधियों का सर्वसम्मत समर्थन मिला और इसी के साथ सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एनसीपी के नए दौर की आधिकारिक शुरुआत हो गई. प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे दोनों ने एनसीपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को श्रद्धांजलि दी, जिनका 28 जनवरी 2026 को बारामती में एक विमान हादसे में निधन हो गया था.
महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम
सुनेत्रा पवार ने अपने दिवंगत पति अजित पवार का स्थान लिया है, जो विमान दुर्घटना में निधन तक इस पद पर बने हुए थे. पार्टी के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के सर्वसम्मत फैसले के बाद सुनेत्रा पवार ने 26 फरवरी को पदभार संभाला.
उन्हें 31 जनवरी को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई, जिसके साथ वह राज्य के इतिहास में यह पद संभालने वाली पहली महिला बन गईं. शपथ ग्रहण से पहले पार्टी में अचानक बने नेतृत्व संकट के बाद उन्हें सर्वसम्मति से एनसीपी विधायक दल का नेता चुना गया था.