नासिक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कांड में फरार आरोपी निदा खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. निदा खान पर न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है, बल्कि उस पर मुख्य आरोपियों की मदद करने और यौन शोषण जैसे गंभीर मामलों में शामिल होने का भी आरोप है.
दरअसल, नासिक पुलिस की स्पेशल टीम पिछले 25 दिनों से निदा खान की तलाश कर रही थी. गिरफ्तारी से बचने के लिए निदा खान ने अग्रिम जमानत लेने की भी कोशिश की थी, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सकी. उसने गर्भावस्था का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत का अनुरोध किया था.
अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि ऐसा लगता है कि सुनियोजित तरीके से ब्रेनवॉश करके पीड़िता (कंपनी की कर्मचारी) को मलेशिया भेजने की साजिश थी.
अब पुलिस ने तकनीकी इनपुट के आधार पर आरोपी निदा खान को छत्रपति संभाजी नगर के नरेगांव परिसर गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अब महिला आरोपी को अपने साथ आगे की पूछताछ के लिए नासिक लेकर रवाना हो गई है.
निदा खान पर गंभीर आरोप
अभियोजन पक्ष (SIT) और पीड़िता के वकीलों ने अदालत में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. TCS अधिकारी निदा खान पर आरोप है कि उसने पीड़िता को बुर्का दिया, धार्मिक किताबें दीं और मोबाइल में इस्लामिक धार्मिक एप्लिकेशन इंस्टॉल करवाए.
जांच में सामने आया कि पीड़िता का नाम बदलकर 'हानिया' रखा जाना था और उसे मलेशिया भेजने की तैयारी थी. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय गिरोह शामिल है.
पीड़िता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एम जी कुरकुटे और नितिन पंडित ने दलील दी कि आरोपियों ने कंपनी में अपने पद का अनुचित लाभ उठाकर पीड़िता को उनका धर्म मानने के लिए मजबूर किया. यही नहीं, पीड़िता की भावनाओं को ठेस पहुंचाकर उसे मांसाहारी भोजन खाने के लिए मजबूर किया और कार्यालय में उसकी जाति को लेकर उसका अपमान भी किया.
मुख्य आरोपी दानिश शेख पर शादी का झांसा देकर रेप का आरोप है, जबकि तौसीफ पर पीड़िता को ब्लैकमेल कर यौन संबंध बनाने का दबाव डालने और छेड़छाड़ का आरोप है.
4 कर्मचारी 18 मई तक न्यायिक हिरासत में
पता हो कि नासिक की एक अदालत ने बीते मंगलवार को इसी मामले के 4 मुख्य आरोपियों को 18 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. इन आरोपियों के नाम रजा रफीक मेमन, तौसीफ बिलाल अत्तार, दानिश शेख और शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी हैं.
इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने 23 अप्रैल को आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की तमाम धाराओं के तहत हिरासत में लिया था.
इससे पहले उन्हें 5 मई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था. मंगलवार को उनकी हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एसवी लाड के सामने पेश किया गया.
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सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की न्यायिक हिरासत की मांग की. अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए चारों आरोपियों को 18 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
बता दें कि टीसीएस में महिला कर्मचारियों के शोषण, जबरन धर्मांतरण के प्रयास, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न के संबंध में दर्ज 9 मामलों की SIT जांच कर रही है. एसआईटी ने इस मामले में एक महिला ऑपरेशन मैनेजर सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया है.
TCS का कड़ा रुख
आईटी दिग्गज कंपनी TCS ने अपनी छवि और कार्यसंस्कृति को लेकर साफ कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या जबरदस्ती को बर्दाश्त नहीं करती. मामले में नाम आने के बाद कंपनी ने तत्काल प्रभाव से आरोपी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और जांच में पूरा सहयोग कर रही है.
(इनपुट: प्रवीण ठाकरे)