महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई की आरे कॉलोनी में पीने के पानी पर संकट गहरा गया है. सोनल रानाडे पिछले कुछ दशकों से आरे कॉलोनी के रॉयल पाम्स इलाके में बनी 'पिकाडिली 1' बिल्डिंग में रह रही हैं. उन्होंने इलाके की बिल्डिंगों में पानी की सप्लाई के लिए बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) और महाराष्ट्र सरकार के साथ लगातार मीटिंग्स की और बातचीत की, लेकिन असल में कुछ नहीं हुआ.
सोनल कहती हैं, "हमारी बिल्डिंग को रोजाना करीब 10 पानी के टैंकरों की जरूरत होती है और इसी वजह से हमारी सोसाइटी का मेंटेनेंस चार्ज बहुत ज्यादा है. ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट और NOC मिलने और सभी प्रॉपर्टी टैक्स भरने के बावजूद, BMC पानी की सप्लाई के लिए पाइपलाइन नहीं बिछा रही है. यहां आस-पास की कुछ झुग्गी-बस्ती पुनर्वास (स्लम रीडेवलपमेंट) वाली बिल्डिंगों में तो पानी की सप्लाई होती है, लेकिन हमें नहीं मिलती."
पिछले 25 सालों से पानी के टैंकरों पर निर्भर रहने का मतलब है कि जब भी पानी के टैंकर वाले हड़ताल पर जाते हैं, तो इसका सीधा असर यहां रहने वालों पर पड़ता है.
मुंबई वॉटर टैंकर एसोसिएशन की हड़ताल की वजह से 32 साल की शीतल सावंत जैसे निवासियों को पानी का इंतजाम करने के लिए काम से छुट्टी लेनी पड़ी है, वहीं एक बड़े प्रोडक्शन हाउस में एडिटर के तौर पर काम करने वाले अतानु मिश्रा, जिनकी पत्नी गर्भवती हैं, बढ़ती मुश्किलों के बारे में बात करते हैं.
'खाना पकाने के लिए पानी नहीं...'
रॉयल पाल्म्स के ही रहने वाले 67 साल के सुरेश तहिलियानी कहते हैं, "मैंने नहाया नहीं है क्योंकि पीने और खाना पकाने के लिए पानी नहीं है. मैं पास की दुकान से पानी की 20 लीटर वाली बोतलें खरीद रहा था, लेकिन अब वे भी खत्म हो गई हैं. सोचिए हम कैसे गुजारा कर रहे हैं, जबकि पिछले 20 साल से हम ऐसे ही हालात में रह रहे हैं. हम पिछले 20 साल से अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन हमें सिर्फ आश्वासन ही मिलते हैं और कुछ नहीं."
वहां रहने वाले बाकी लोग भी मानते हैं कि इलाके में पानी की बोतलें भी नहीं मिल रही हैं. एक और निवासी मंगेश वानरकर ने बताया कि वे रॉयल पाल्म्स के बाहर पानी की बोतलें ढूंढ रहे थे, जिससे उनके घर के लोगों को पीने के लिए कुछ पानी मिल सके. कुछ लोगों का कहना है कि जब उन्हें पानी मिला, तो हर बोतल के लिए बहुत ज्यादा कीमत मांगी गई. कुछ लोग, जिनके दोस्त स्लम रिहैबिलिटेशन वाली इमारतों में रहते हैं, उनसे पानी मांगकर अपनी बोतलें भर रहे हैं. इसके लिए उन्हें रॉयल पाल्म्स की पहाड़ी और खड़ी सड़कों पर पानी की बड़ी बोतलें ले जाने का जोखिम भी उठाना पड़ता है.
दूसरी तरफ, मुंबई वॉटर टैंकर एसोसिएशन (MWTA) का कहना है कि वे हड़ताल पर नहीं हैं, बल्कि महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले का पालन कर रहे हैं, जिसमें उन्हें जमीन के नीचे का पानी निकालने और बेचने के लिए केंद्र सरकार के जल शक्ति विभाग से नया लाइसेंस लेने को कहा गया है. उनका कहना है कि वे उसमें बताई गई गाइडलाइंस का पालन नहीं कर सकते.
गाइडलाइंस क्या कहती हैं?
गाइडलाइंस के मुताबिक, सप्लाई किए गए पानी का इस्तेमाल सिर्फ पीने के मकसद से ही किया जाना चाहिए. इसमें यह भी जरूरी है कि जिस जगह पर पानी निकालने का स्ट्रक्चर लगा हो, वहां करीब 200 स्क्वायर मीटर जमीन के मालिकाना हक का सबूत दिखाना होगा. साथ ही टैंकर के मालिकाना हक या लीज का सबूत भी दिखाना होगा. ग्राउंड वॉटर की क्वालिटी की जांच भी करवानी होगी. MWTA के प्रवक्ता अंकुर शर्मा का कहना है कि जो टैंकर मालिक पिछले 90 सालों से यह कारोबार कर रहे हैं, वे इन नियमों का पालन नहीं कर सकते.
पानी के टैंकर कैसे काम करते हैं?
मुंबई में पानी के टैंकरों के काम करने के तरीके के बारे में बताते हुए शर्मा कहते हैं कि जिन जमीनों पर कुएं या ट्यूबवेल बने हैं, वे दूसरे लोगों (जमीन मालिकों) की हैं. पानी के टैंकर मालिकों के पास अपनी जमीन नहीं होती, इसलिए पहली शर्त पूरी नहीं की जा सकती. इसके अलावा, वे इस बात पर जोर देते हैं कि मुंबई में पानी के टैंकर पीने लायक नहीं, बल्कि ऐसा पानी सप्लाई करते हैं, जिसका इस्तेमाल ज्यादातर मुंबई में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में होता है. इसके साथ ही, यह पानी रिहायशी और कमर्शियल जगहो पर पीने के अलावा दूसरे कामों के लिए भी सप्लाई किया जाता है.
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पूरे शहर में काम करने के लिए 2000 से ज़्यादा टैंकरों के पास लाइसेंस है. हालांकि, हाल ही में केंद्र सरकार की गाइडलाइंस को लागू करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के तहसीलदार ऑफिस ने टैंकर मालिकों को नोटिस जारी कर सात दिन के अंदर नियमों का पालन करने को कहा. शर्मा का कहना है कि उन्होंने राज्य सरकार को यह बताने की कोशिश की कि वे इन नियमों का पालन नहीं कर सकते और उनसे गुजारिश की है कि वे इस मामले को केंद्र सरकार के सामने रखें.
शहर पहले से ही 10% पानी की कटौती का सामना कर रहा है, क्योंकि पानी सप्लाई करने वाली 7 झीलों के कैचमेंट एरिया में कम बारिश का अनुमान है. ऐसे में, पानी के टैंकरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल मुंबई के परेशान लोगों की मुश्किलों को और बढ़ा रही है, जो सरकार के एक्शन का इंतज़ार कर रहे हैं.