ईरान में फंसे भारतीय नाविकों ने जंग के बीच अपने खौफनाक अनुभव साझा किए हैं. UAE की टैंकर जहाज एमटी वैलियंट रोआ (MT Valiant Roar) के चालक दल को दिसंबर में डीजल तस्करी के आरोप में ईरान ने हिरासत में लिया था. बाद में भारतीय दूतावास की मदद से 27 फरवरी को रिहाई मिली, लेकिन अगले ही दिन जंग शुरू हो गई.
जहाज के कप्तान विजय कुमार ने बताया कि वे बंदर अब्बास में थे, तभी उनके ऊपर से मिसाइलें गुजर रही थीं. उन्होंने कहा, 'नजारे बिल्कुल फिल्म 'पर्ल हार्बर' जैसे थे. जहाजों पर हमले होते थे और हमारे जहाज में कंपन महसूस होता था. तीन-चार दिन तक हम सो नहीं पाए और जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते रहे.'
विजय कुमार ने बताया कि हालात बिगड़ने पर भारतीय दूतावास ने ईरानी अधिकारियों से बात कर चालक दल को जहाज से उतारकर होटल में शिफ्ट कराया. उन्होंने कहा, 'होटल के एक तरफ नौसैनिक अड्डा था और दूसरी तरफ हवाई अड्डा. रात में बमबारी होती थी, तो हम खुले आसमान के नीचे खड़े हो जाते थे.'

1800 किलोमीटर का जोखिम भरा सफर तय किया
कप्तान के अनुसार, कई दिनों बाद दूतावास ने बताया कि बचाव का रास्ता आर्मेनिया के जरिए ही संभव है, लेकिन यह करीब 1800 किलोमीटर का जोखिम भरा सफर था. उन्होंने बताया, 'हमारे पास पैसे भी नहीं थे, क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने हमारा सामान और पैसे ले लिए थे. एक टैक्सी चालक 3000 डॉलर में सीमा तक ले जाने को तैयार हुआ. किसी तरह पैसे जुटाकर 22 फरवरी को हम निकल पड़े.'
करीब 25 घंटे की यात्रा के दौरान वे ऐसे इलाकों से गुजरे, जहां लगातार बमबारी हो रही थी. उन्होंने कहा, 'हमारे पास रुकने का कोई विकल्प नहीं था. दो ड्राइवर लगातार गाड़ी चलाते रहे. अंत में हम आर्मेनिया सीमा से 2 किलोमीटर पहले पहुंचे और वीजा के लिए दो दिन इंतजार करना पड़ा. इसमें भी दूतावास ने मदद की.'
6000 मीट्रिक टन ईंधन लेकर जा रहे थे
चालक दल ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वे 6000 मीट्रिक टन ईंधन लेकर जा रहे थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी अधिकारियों ने उन्हें पकड़ लिया और डीजल तस्करी का आरोप लगाया, जिसका कोई सबूत नहीं दिया गया. कुछ लोगों को जेल में भी रहना पड़ा.
दल के अन्य सदस्यों में केतन मेहता, वेंकट राव और मसूद आलम शामिल हैं. सभी ने कहा कि वे किस्मत से सुरक्षित भारत लौट पाए और इस भयावह अनुभव को कभी नहीं भूल पाएंगे.