महाराष्ट्र के जालना जिले में बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने आम उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है. जामवाड़ी गांव में अचानक बदले मौसम के कारण आम के फलों की बड़े पैमाने पर गिरावट हुई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. जामवाड़ी के किसान विजय वाडेकर ने अपने खेत में करीब 1800 आम के पेड़ लगाए थे. इस साल उन्हें करीब 10 से 12 टन आम उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन असमय बारिश और तेज हवाओं के कारण बड़ी मात्रा में आम के फल जमीन पर गिर गए.
अब उनका अनुमान है कि उत्पादन घटकर केवल 1 से 2 टन तक ही सीमित रह जाएगा. विजय वाडेकर के अनुसार, अगर आने वाले दिनों में फिर से बारिश और तेज हवाएं चलती हैं, तो बचे हुए आम भी गिर सकते हैं, जिससे 100 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका है. इस नुकसान के चलते उन्हें करीब 12 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है. उन्होंने प्रशासन से तत्काल पंचनामा कर मुआवजा देने की मांग की है.
यह पहली बार नहीं है जब किसानों को मौसम की मार झेलनी पड़ी है. करीब 10 दिन पहले भी जालना जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि (गारपीट) हुई थी, जिससे बदनापुर तहसील के देवपिंपलगांव और जालना तहसील के शिरसवाड़ी क्षेत्रों में आम, अनार और अंगूर के बागानों को भारी नुकसान पहुंचा था. ओलों की वजह से पेड़ों पर लगे फल टूटकर नीचे गिर गए थे, जबकि जो फल पेड़ों पर बचे थे, वे भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे. अब दोबारा हुई असमय बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है.
लगातार हो रहे नुकसान के कारण जालना के फल उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है. किसानों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द सर्वे (पंचनामा) कर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें इस संकट से राहत मिल सके.
जालना के एक और किसान ने बताया, "कल हुई बेमौसम बारिश के कारण मेरे आम के बाग को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. मेरे पास लगभग 1800 आम के पेड़ हैं. इन 1800 पेड़ों से मुझे 10 से 12 टन आम उत्पादन की उम्मीद थी. लेकिन अब 10 से 12 टन उत्पादन की बात दूर रह गई है, और अब मेरे हाथ में केवल 1 से 2 टन ही आम आने की संभावना है.
अगर फिर से बारिश हुई, तो और अधिक नुकसान होने की आशंका है. इससे मेरा 100 प्रतिशत नुकसान हो सकता है और पेड़ों पर लगे सभी आम गिर सकते हैं. इस वजह से मेरा लगभग 12 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है. सरकार से हमारी मांग है कि संबंधित विभाग के अधिकारियों को भेजकर हमारे नुकसान का सर्वे कराया जाए और हमें उचित मुआवजा दिया जाए.