बृहन्मुंबई महानगरपालिका में सत्ता गठन को लेकर सियासी बातचीत तेज हो गई है. चुनाव में दूसरे नंबर पर रही एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने अब मेयर पद को लेकर बीजेपी के सामने 50-50 पावर शेयरिंग फॉर्मूला रख दिया है. इस प्रस्ताव के तहत मुंबई के मेयर का कार्यकाल ढाई-ढाई साल के लिए दोनों दलों में बांटने की मांग की गई है.
शिंदे गुट के नेताओं और नवनिर्वाचित पार्षदों का कहना है कि बीएमसी में स्थिर सरकार बनाने के लिए यह सबसे व्यावहारिक और सम्मानजनक रास्ता है. पार्टी का तर्क है कि वो सत्ता गठन में निर्णायक भूमिका निभा रही है, इसलिए मेयर पद पर उसकी भागीदारी जरूरी है.
बालासाहेब ठाकरे की जन्मशती का तर्क
शिंदे सेना इस मांग को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक मुद्दे से भी जोड़ रही है. पार्टी चाहती है कि बालासाहेब ठाकरे की जन्मशती वर्ष में मुंबई का मेयर शिवसेना (शिंदे गुट) से हो. नेताओं का मानना है कि शिवसेना की पहचान और मुंबई से उसका ऐतिहासिक रिश्ता इसी प्रतीकात्मक पद से जुड़ा रहा है.
शिंदे गुट के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे का पूरा राजनीतिक जीवन मुंबई और बीएमसी से जुड़ा रहा है. ऐसे में जन्मशती वर्ष में मेयर पद पर शिवसेना का प्रतिनिधि होना पार्टी और कार्यकर्ताओं के लिए बेहद अहम है.
BJP-शिंदे गुट के बीच बातचीत जारी
सूत्रों के मुताबिक, इस 50-50 फॉर्मूले को लेकर बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं के बीच लगातार बातचीत चल रही है. हालांकि अब तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है. दोनों पक्ष सीटों के गणित और भविष्य की राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखकर विकल्पों पर मंथन कर रहे हैं.
बीजेपी के लिए यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि बीएमसी देश की सबसे अमीर नगर निकाय है और यहां सत्ता का राजनीतिक असर सीधे महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ता है.
फैसला BJP हाईकमान के हाथ में
शिंदे गुट ने साफ कर दिया है कि अंतिम फैसला बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को लेना है. अब सबकी नजरें बीजेपी हाईकमान पर टिकी हैं कि वो इस प्रस्ताव को मानकर बीएमसी में मजबूत और स्थिर गठबंधन बनाना चाहता है या फिर कोई वैकल्पिक रास्ता तलाशेगा.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर 50-50 फॉर्मूले पर सहमति बनती है तो बीएमसी में सत्ता संघर्ष थम सकता है, लेकिन अगर यह मांग ठुकराई गई तो गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता.
BMC चुनाव के नतीजे में किसका पलड़ा भारी?
मुंबई नगर निगम चुनाव में बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना गठबंधन को 118 सीटें मिलीं. बीजेपी ने अकेले 89 सीटें जीतीं. शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं. उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) को 65 सीटें, कांग्रेस को 24 सीटें, AIMIM को 8 सीटें, MNS को 6 सीटें और समाजवादी पार्टी को 2 सीटें मिलीं. कुल 227 सीटों पर चुनाव हुए. बहुमत हासिल करने के लिए 114 सीटों पर जीत जरूरी है.