महाराष्ट्र के नासिक में टीसीएस कंपनी के सेक्शुअल हरॅसमेंट औऱ धर्मांतरण के मामले में आरोपी निदा खान को गिरफ्तार करने के बाद अब पुलिस ने उसकी मदद करने वालों पर भी शिकंजा कसा है. इसमें AIMIM पार्टी के एक पार्षद का नाम सामने आया है. पार्षद अब्दुल मतीन पटेल पर उसे नारेगाव के कौसर पार्क एरिया मे छुपने के लिए जगह देने का आरोप है. इस मामले में पटेल के खिलाफ नासिक पुलिस ने बीएनएस के 249 के तहत FIR दर्ज की है.
मतीन पटेल को लिया गया हिरासत में
पुलिस अब मतीन पटेल से भी पूछताछ करेगी, और जानने की कोशिश करेगी कि क्या निदा की मदद करने के पीछे कोई राजनीतिक साजिश थी? निदा को नासिक पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद अब मतीन पटेल को भी हिरासत में ले लिया गया है.
दूसरी तरफ इसी मामले मे AMIM के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील पर भी सत्तापक्ष ने निशाना साधा है. शिवसेना के नेता औऱ सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाठ ने निदा की मदद में जलील का भी हाथ होने की आशंका जताई है. इतना ही नही, इस मामले मे पुलिस से गुहार लगाई है कि जलील से भी पूछताछ कर सच उजागर किया जाए.
चल रहा था धर्मांतरण का कथित नेटवर्क
बता दें कि टीसीएस कांड सामने आने के बाद सरकारी पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया था कि निदा खान और अन्य आरोपी कथित तौर पर टीसीएस में काम करने वाले जूनियर कर्मचारियों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करते थे. आरोप है कि कर्मचारियों पर अपना धर्म छोड़कर दूसरा धर्म अपनाने का दबाव बनाया जाता था. इसके लिए उन्हें बुर्का दिया जाता था और इस्लाम से संबंधित धार्मिक किताबें भी उपलब्ध कराई जाती थीं. इतना ही नहीं, उनके मोबाइल फोन में धार्मिक शिक्षा से जुड़े कई एप्लीकेशन भी इंस्टॉल कराए गए थे.
जांच एजेंसियों के अनुसार, निदा खान कथित तौर पर पीड़ितों को अपने घर ले जाती थी, जहां उन्हें नमाज़ पढ़ने का तरीका, हिजाब और बुर्का पहनने जैसी चीजें सिखाई जाती थीं. जांच में यह भी सामने आया कि धर्म परिवर्तन के बाद पीड़ितों के नाम बदलने की भी योजना बनाई गई थी. पुलिस को पीड़ितों के मोबाइल फोन से कई इस्लामिक रील्स, यूट्यूब लिंक और इंस्टाग्राम पोस्ट मिले हैं, जिन्हें जांच में अहम साक्ष्य माना जा रहा है.
ऐसे खुली सारे कांड की पोल
बताया जा रहा है कि पूरे मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई, जब एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने नासिक पुलिस को शिकायत दी. शिकायत में कहा गया था कि एक निजी कंपनी में कार्यरत हिंदू महिला रमजान के दौरान रोजे रख रही है. इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गुप्त जांच शुरू की, जिसमें बाद में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. पुलिस जांच में यह आरोप भी सामने आया कि कुछ टीम लीडर अपने पद और अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर कर्मचारियों को निशाना बनाते थे. आरोप है कि चुनिंदा कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की कोशिश की जाती थी. मामले के उजागर होने के बाद पुलिस ने सात पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि निदा खान नाम की आरोपी लंबे समय तक फरार चल रही थी.
पकड़ी गई फरार चल रही निदा
लगातार करीब 25 दिनों तक पुलिस को चकमा देने के बाद आखिरकार निदा खान को छत्रपति संभाजी नगर के नारेगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी के बाद उसकी पहली तस्वीर भी सामने आई. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वह पिछले कुछ दिनों से कैसर कॉलोनी स्थित एक फ्लैट में छिपकर रह रही थी. हैरानी की बात यह रही कि उसी फ्लैट में उसके चार रिश्तेदार भी मौजूद थे.
पुलिस को लगातार उसके अलग-अलग ठिकानों पर छिपने की जानकारी मिल रही थी, लेकिन वह हर बार जांच एजेंसियों की पकड़ से बच निकलती थी. आखिरकार नासिक क्राइम ब्रांच और छत्रपति संभाजी नगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया. जानकारी के अनुसार, रात करीब 11:30 बजे पुलिस टीम ने उसे डिटेन किया.