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230 सीटों पर कौन उम्मीदवार हो सकता है, बैठे-बैठे बता सकता हूं: दिग्विजय

दिग्विजय सिंह ने कहा कि नर्मदा परिक्रमा करने के बाद उन्हें अच्छी तरह से अंदाजा हो गया है कि प्रदेश में कौन नेता कितना लोकप्रिय है. दिग्विजय ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में इस बार कांग्रेस का सूपड़ा साफ तो कतई नहीं होने जा रहा.

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दिग्विजय सिंह (फोटो-इंडिया टुडे आर्काइव)
दिग्विजय सिंह (फोटो-इंडिया टुडे आर्काइव)

पंचायत आजतक के 10वें अहम सत्र 'खत्म होगा बनवास' में खुद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन श्वेता सिंह ने किया.

कार्यक्रम में दिग्विजय सिंह से पहला सवाल किया गया कि आखिर मायावती ने आपको बीजेपी का एजेंड क्यों कहा? दिग्विजय सिंह ने कहा कि ये नजर-नजर की फेर है. उन्होंने कहा कि अगर पिछले कुछ सालों में संघ और भाजपा की किसी को सबसे ज्यादा गाली पड़ी है तो उसमें मेरा नाम सबसे ऊपर है. फिर इस तरह का बयान में केवल दबाव में लगता है.

एंकर श्वेता सिंह ने पूछा कि क्या मध्य प्रदेश में उम्मीदवारों को तय करने की जिम्मेदारी आपको दी गई है? इसके जवाब में दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे स्क्रीनिंग कमेटी में भी नहीं हैं, सेंट्रल इलेक्शन कमेटी भी नहीं हैं. मुझे स्क्रीनिंग कमेटी में खास मेहमान के तौर पर बुलाया है. मैं वहां जाता हूं और अपनी बात कह देता हूं.

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इसके बाद यह सवाल पूछा गया कि खास मेहमान का मतलब यह समझा जाए कि टिकट और उम्मीदवारों के बारे में किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है, तभी आपको बुलाया जा रहा है. इसके जवाब में दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे मध्य प्रदेश को थोड़ा बहुत जानते हैं. उन्होंने कहा, 'हर ब्लॉक के लोगों को मैं जानता हूं. कौन कितना लोकप्रिय है, थोड़ा बहुत मुझे भी अंदाजा है. परिक्रमा करने के बाद इसे मैंने और पुख्ता कर लिया. आज 230 सीटों पर कौन उम्मीदवार हो सकता है, मैं बिना कागज देखे आपको बता सकता हूं.'

उन्होंने महागठबंधन के सवाल पर कहा कि मोदी और शाह से त्रस्त लोग जरूर साथ आएंगे. इसमें केवल विपक्षी पार्टियां ही नहीं, बीजेपी के भी कुछ नेता होंगे. दिग्विजय की मानें तो लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी को केवल 31 फीसद वोट मिला था. जिसे मोदी और शाह बड़ी जीत मानते हैं. लेकिन उन्हें पता नहीं कि 69 फीसदी लोगों ने उन्हें वोट नहीं दिया, फिर आप उसे बड़ी जीत कैसे मान सकते हैं.

शिवराज पर हमले करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि बुधनी में एक परिवार है जो सभी काम करता है. जैथ का एक परिवार है जो ठेके भी लेता है. इस परिवार के अलावा बुधनी में किसी का विकास नहीं हुआ. जैथ गांव में 24 घंटे बिजली होती है, जबकि बगल के गांव में बिजली ही नहीं आती है.

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उन्होंने कहा कि चुनाव आते हैं तो बीजेपी नेताओं को राम याद आते हैं. चुनाव खत्म होते ही ये राम को भूल जाते हैं. राम के वजूद पर कोई सवाल नहीं उठा सकता है. इस देश में सियासी युद्ध खूब हुए, लेकिन कभी धर्म युद्ध नहीं हुआ, क्योंकि यहां सभी धर्मों के मानने वाले लोग हैं.

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