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MP: कलेक्टर का अजीबोगरीब फरमान, कहा- हर कर्मचारी खरीदे 50 किलो प्याज

गोदामों में सड़ रही प्याज को बचाने के लिए मध्य प्रदेश में खरगोन के कलेक्टर अशोक कुमार वर्मा ने एक अजीब फरमान जारी किया है. कलेक्टर ने जिले के अफसरों और कर्मचारियों से कहा है कि जिले में हर कर्मचारी और अधिकारी कम से कम 50 किलो प्याज खरीदें.

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गोदामों में प्याज न सड़े, इसलिए सुनाया फरमान
गोदामों में प्याज न सड़े, इसलिए सुनाया फरमान

गोदामों में सड़ रही प्याज को बचाने के लिए मध्य प्रदेश में खरगोन के कलेक्टर अशोक कुमार वर्मा ने एक अजीब फरमान जारी किया है. कलेक्टर ने जिले के अफसरों और कर्मचारियों से कहा है कि जिले में हर कर्मचारी और अधिकारी कम से कम 50 किलो प्याज खरीदे.

प्याज को सड़ने से बचाने के लिए दिया आदेश
कलेक्टर साहब का कहना है कि सरकार के आदेश के बाद खरगोन जिले में भी किसानों से जून माह में 6 रुपये किलो की दर पर खरीदी गई थी. भंडारण केंद्रों में रखी गई प्याज खराब होने की दशा में अब इसे बेचने के लिए आश्रम, जेल, अस्पताल, एमडीएम केंद्रों के साथ-साथ उपभोक्ताओं और सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को भी प्याज खरीदने के लिए कहा गया है, ताकि प्याज खराब न हो सके और सरकारी राशि की भरपाई भी हो जाए.

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3 किलोमीटर का सफर तय करके जा रहे हैं प्याज खरीदने
आपको बता दें कि मार्केटिंग फेडरेशन द्वारा खरगोन जिले में 18 हजार 443 क्विंटल प्याज खरीदे गए थे. करीब 1600 क्विंटल प्याज खराब होने के बाद उसका नष्टिकरण कर दिया गया. जबकि शासन और कलेक्टर के आदेश के बाद अब तक करीब 550 क्विंटल विभिन्न स्तरों पर 4 रुपये किलोग्राम की दर पर बेचा जा चुका है. अभी भी जिला प्रशासन के पास करीब 16 हजार 293 क्विंटल विभिन्न भंडारण केंद्रों पर बची हुई है और इसी को बेचने के लिए जिला प्रशासन जद्दोजहद कर रहा है. अब कर्मचारियों के सामने मजबूरी है कि वो शहर से लगभग 3 किमी दूर एक वेयर हाउस पर जाकर प्याज खरीद रहे हैं.

कोई बाध्यता नहीं- कलेक्टर
अब कर्मचारी भले ही खुल कर फरमान का विरोध नहीं कर रहे लेकिन दबी जुबान में इसे तुगलकी बता रहे हैं. हालांकि कलेक्टर का कहना है कि कर्मचारियों को प्याज खरीदने के लिए कोई बाध्यता नहीं रखी गई है. वे स्वेच्छानुसार अपने घर के उपयोग के लिए प्याज खरीद सकते हैं.

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