रांची हिंसा के मामले में पुलिस ने मंगलवार को आरोपियों का एक पोस्टर जारी किया. इसमें 18 फोटो थीं. पोस्टर में युवक सड़कों पर पत्थर चलाते देखे जा रहे थे. हालांकि, कुछ देर ही बाद पुलिस ने ये पोस्टर हटा दिया. बताया गया कि आरोपियों का पोस्टर लगाने के चंद मिनटों बाद ही हटाया गया. नगर निगम के कर्मचारियों ने फोटो सेशन के बाद ये पोस्टर उतार लिया है.
बाद में रांची पुलिस की तरफ से सफाई में प्रेस नोट जारी किया गया. पुलिस का कहना था कि पोस्टर में कुछ संशोधन किया जाना था, इसलिए हटाया गया है. वहीं, डोरंडा पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में नवाब चिश्ती को हिरासत में लिया है. नवाब सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था. नवाब चिश्ती से पुलिस पूछताछ कर रही है. बताया जाता है कि पहले भी ये हिंसा भड़काने में आरोपित है. 2019 में जेल भी गया था.
रांची पुलिस ने 10 जून को हिंसा मामले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन्हें आज पहचान के लिए कोतवाली थाने में रखा गया, जिसके बाद कोरोना टेस्ट के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया. बाद में न्यायिक हिरासत में होटवार जेल भेजा गया. हालांकि रांची पुलिस ने अभी इन तीनों आरोपियों का नाम नहीं बताया है. पुलिस का कहना है कि इनकी पहचान करके सबूत के साथ गिरफ्तार किया है.
रांची के एसपी और एसआईटी के हेड अंशुमन कुमार ने बताया कि जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी. उन्होंने बताया कि पुलिस सही दिशा में जांच कर रही है.
मरने वालों के परिजन को 50-50 लाख का मुआवजा मिले
इधर, कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी हिंसा के बाद मारे गए दो युवकों को शहीद का दर्जा देने के इच्छुक हैं. उन्होंने 50 लाख रुपए मुआवजे की भी मांग की है. उनका मानना है कि मुदस्सिर और शैल निर्दोष थे. उनका हिंसा से कोई लेना-देना नहीं था. पुलिस को गोली नहीं चलानी चाहिए थी. गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों का पोस्टर भी जारी किया जाना चाहिए. यदि पथराव किया जाता है तो गोली चलाना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि नूपुर शर्मा का बयान बेहद आपत्तिजनक था.
इरफान अंसारी का दावा है कि अगर कोई भगवान राम का अपमान भी करता है तो वह इस मुद्दे को उठाने और इसका विरोध करने वाले पहले व्यक्ति होंगे.