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झारखंड के शहरों में किसकी सरकार? सोरेन का चलेगा जादू या BJP का जलवा रहेगा बरकरार

झारखंड के 48 नगर निकाय चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि शहरी इलाके में बीजेपी अपना दबदबा पहले की तरह बनाए रखती है या फिर सीएम हेमंत सोरेन का जादू चलता है. राज्य के 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत के अध्यक्ष और पार्षद चुने जाने हैं?

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झारखंड के शहरों में क्या सीएम हेमंत सोरेन का चलेगा जादू(Photo-ANI)
झारखंड के शहरों में क्या सीएम हेमंत सोरेन का चलेगा जादू(Photo-ANI)

झारखंड के नगर निकाय चुनाव में बीजेपी का सियासी दबदबा बरकरार रहेगा या फिर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जादू शहरों में भी चलेगा. शुक्रवार को नगर निकाय चुनाव नतीजों से साफ हो जाएगा. प्रदेश के इतिहास में पहली बार शहरी निकाय में पहली बार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू होने के बाद चुनाव हुए है.  

प्रदेश के 48 शहरी निकाय चुनाव में 9 नगर निगम, 20 नगर पालिका परिषद और 19 नगर पंचायत के अध्यक्ष और पार्षद चुने जाने हैं. मेयर और अध्यक्ष पद के लिए  562 उम्मीदवार हैं तो वार्ड पार्षद के 5,562 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होना है. इस तरह कुल 6,124 प्रत्याशियों का भाग्य शुक्रवार को तय होगा? 

रांची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे बड़े शहरों सहित 9 नगर निगम में मेयर और पार्षद चुने जाने हैं. ऐसे ही बाकी के नगर पालिका और नगर पंचायत के लिए अध्यक्ष और सभासद के लिए चुनाव हुए हैं. बैलेट पेपर के जरिए नगर निकाय के चुनाव हुए हैं, जिसके चलते नतीज घोषित होने में देर हो सकती है. 

झारखंड की शहर में किसकी होगी सरकार
झारखंड नगर निकाय चुनाव राजनीतिक दलों के सिंबल पर नहीं लड़े गए बल्कि उम्मीदवारों को व्यक्तिगत चुनाव चिह्न आवंटित किए गए थे. इसके बावजूद बीजेपी से लेकर जेएमएम और कांग्रेस तक अपने समर्थित उम्मीदवारों को उतार रखा था और उन्हें जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. 

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धनबाद जैसे बड़े शहरों में सत्ताधारी इंडिया ब्लॉक के तीन घटकदल जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी  एक-दूसरे के सामने चुनावी मैदान में थे. इसके अलावा रांची और जमशेदपुर  जैसे नगर निगम में राजनीतिक दलों ने एड़ी चोटी की जोर लगाया. ऐसे में यह चुनाव स्थानीय विकास नहीं बल्कि सत्ताधारी इंडिया गठबंधन और विपक्षी भाजपा के जनाधार की अग्निपरीक्षा भी माना जा रहा है. 

झारझंड के 9 नगर निगम के मेयर और पार्षद चुने जाने हैं. इसमें रांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, देवघर, हजारीबाग, गिरिडीह, आदित्यपुर (सरायकेला-खरसावां) और मेदिनीनगर (पलामू) नगर निगम शामिल है. पिछली बार चुनाव में ज्यादातर शहरों में बीजेपी के मेयर चुने गए थे, लेकिन इस बार सियासी समीकरण बदले हुए हैं. 

झारखंड के 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत 

झारखंड के 20 नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष और सभासद चुना जाना है. गढ़वा, विश्रामपुर,चतरा, झुमरी तिलैया, मधुपुर, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, मिहिजाम,चिरकुंडा, फुसरो,रामगढ़, लोहरदगा, गुमला,सिमडेगा, खूंटी, चाईबासा,चक्रधरपुर, कपाली नगर परिषद शामिल है. 

राज्य की 19 नगर पंचायत में अध्यक्ष और सभासद चुने जाने हैं. इसमें बासुकीनाथ, बुंडू, हुसैनाबाद, जामताड़ा, खूंटी, कोडरमा, लातेहार, मझिआंव, राजमहल, सरायकेला, नगर उंटारी, चाकुलिया , डोमचांच, बरहरवा, छत्तरपुर,धनवार, हरिहरगंज, बड़की सरिया और महागामा नगर पंचायत है. इस तरह से नगर परिषद और नगर पंचायत में 39 अध्यक्ष और 1042 पार्षद चुने जाएगें.

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झारखंड में पहली बार आरक्षण व्यवस्था

झारखंड के इतिहास में पहली बार नगर निकाय चुनाव में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), महिलाओं और पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए विस्तृत आरक्षण व्यवस्था लागू की गई. इस नई व्यवस्था के कारण कई नए चेहरों को चुनावी राजनीति में आने का मौका मिला है, जिससे सामाजिक समीकरणों के बदलने की पूरी संभावना है.

बीजेपी अपना वर्चस्व बरकरार रख पाएगी

झारखंड नगर निकाय के पिछले चुनाव (2018) में जब दलीय आधार पर वोटिंग हुई थी, उस समय बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया था. बीजेपी ने उस समय 34 नगर निकाय में से 21 शहरों में जीत हासिल कर अपना दबदबा बनाया था. रांची, हजारीबाग और मेदिनीनगर जैसे प्रमुख निगमों पर भाजपा का कब्जा था. 

इस बार बिना पार्टी सिंबल के चुनाव होने के बावजूद बीजेपी अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश में है जबकि सत्ताधारी इंडिया गठबंधन अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश में है.  ऐसे में नगर निकाय चुनाव के नतीजे बताएंगे कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली इंडिया गठबंधन सरकार की लोकप्रियता शहरी क्षेत्रों में कितनी बरकरार है और भाजपा का संगठनात्मक ढांचा कितना मजबूत हुआ है.

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