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झारखंड: राज्यसभा चुनाव से पहले JMM का कांग्रेस को झटका, दोनों सीटों पर दावेदारी का ऐलान

झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले जेएमएम और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया है. जेएमएम ने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को पार्टी के विधायकों और पदाधिकारियों की बैठक हुई.(Photo: ITG)
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को पार्टी के विधायकों और पदाधिकारियों की बैठक हुई.(Photo: ITG)

झारखंड में राज्यसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस के बीच दरार और तकरार बढ़ गई है. झारखंड में राज्यसभा के दो सीटों पर चुनाव 18 जून को होना है. इसके लिए नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून है. इससे पहले सीटों पर  दावेदारी को लेकर जेएमएम ने कांग्रेस की मुश्किलों को बढ़ा दिया है. जेएमएम ने ऐलान कर दिया है कि पार्टी दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी. यानी कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा के लिए यह सफर आसान नहीं होगा.

जेएमएम के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर पार्टी के विधायकों और पदाधिकारियों की बैठक हुई. बैठक में यह फैसला लिया गया कि कांग्रेस ने उम्मीदवार की घोषणा से पहले जेएमएम को कॉन्फिडेंस में नहीं लिया. इसी वजह से पार्टी ने एक के बजाय दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है.

बैठक के बाद सरकार में मंत्री जोगेन्द्र महतो और विधायक बैद्यनाथ राम ने बताया कि विधायकों की भावना है कि जेएमएम यहां खाली हो रही दोनों सीटों पर उम्मीदवार को मैदान में उतारे. हालांकि इस पर आखिरी फैसला लेने के लिए हेमंत सोरेन को ही अधिकृत कर दिया गया है. उम्मीद है कि शनिवार तक उम्मीदवारों के नाम की घोषणा भी हो जाएगी.

विधायक और पूर्व मंत्री बैजनाथ राम ने बताया कि कांग्रेस की ओर से प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित करने के पहले पार्टी को विश्वास में नहीं लिया गया. उन्होंने बताया कि राज्यसभा की दोनों सीटों पर जेएमएम की दावेदारी बनती है, इसलिए बैठक में मौजूद पार्टी के सभी नेताओं ने दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की सलाह दी.

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ऐसी स्थिति में जीत के लिए आवश्यक 28 मत प्राप्त करना 34 विधायकों वाली जएमएम के लिए एक सीट पर तो बिल्कुल आसान रहेगा लेकिन दूसरी सीट पर चुनाव लड़ रहे कांग्रेस उम्मीदवार का खेल बिगड़ जाएगा. बेशक खेल बिगड़ने से सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होगा. जबकि फायदा यहां के विपक्ष के उम्मीदवार को मिल जाएगा. चूंकि जेएमएम का दूसरा उम्मीदवार 'हम तो डूबे गंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे' की कहावत को सही साबित कर सकता है अगर सहमति से गठबंधन में रास्ता नहीं निकला तो.

जेएमएम के फैसले से कांग्रेस को झटका

कांग्रेस की ओर से प्रणव झा को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया गया है. बताया गया कि इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी हेमंत सोरेन से फोन पर बात की थी, लेकिन अब जेएमएम के कड़े तेवर और दबाव की राजनीति का सियासी तापमान बढ़ गया है. यह भी कहा गया है कि मल्लिकार्जुन खरगे से लालू यादव की भी बात उनके 4 विधायकों के समर्थन कांग्रेस के पक्ष में प्राप्त करने के लिए हो चुकी है.

प्रणव झा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के राजनीतिक सलाहकार हैं, जिन्हें कांग्रेस ने झारखंड से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है.

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प्रणव झा मूल रूप से बिहार के भागलपुर (कहलगांव) के रहने वाले हैं, लेकिन उनके पिता बोकारो में कार्यरत थे, इसलिए उनकी शिक्षा-दीक्षा बोकारो में ही पूरी हुई.

दरअसल 18 जून को होने वाले चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा आश्वस्त जेएमएम दिखती है. जीत के लिए एक सीट पर जरूरी 28 वोट से 6 ज्यादा मत उसके पास हैं. ऐसे में दूसरी सीट के लिए सीधा संघर्ष कांग्रेस और बीजेपी के बीच दिखता है. कांग्रेस उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे तो उसे 12 मत का जुगाड़ करना होगा, वहीं NDA उम्मीदवार को सिर्फ 4.

दरअसल राज्य में चल रही हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली इंडिया गठबंधन की सरकार को 56 विधायक समर्थन दे रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि हेमंत सोरेन की मदद मिलेगी और जेएमएम अपनी सीट पर जीतने के बाद बचे हुए मत को कांग्रेस के पाले में पोल करवाने में पूरा सहयोग करेगी.

लेकिन कांग्रेस को झटका इसलिए लगा है कि जेएमएम के तेवर बदले-बदले हैं. वह खुद एक सीट पर तो जीत दर्ज कर लेगी लेकिन कांग्रेस को जितवाने में मदद करने के बजाय उम्मीदवार दूसरी सीट पर भी उतारकर उसका खेल खराब कर देगी. साथ ही प्रणव झा, कांग्रेस उम्मीदवार जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के करीबी और सलाहकार बताए जाते हैं, उनको परेशानी में डालकर सीधे कांग्रेस नेतृत्व को भी चुनौती देती फिलहाल जेएमएम दिख रही है.

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