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जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी के ठिकानों पर छापेमारी, टेरर फंडिंग पर NIA का एक्शन

NIA ने जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित संगठन से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में श्रीनगर और शोपियां के तीन ठिकानों पर छापेमारी की. कार्रवाई के दौरान कई संदिग्ध वित्तीय दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बरामद किए गए. एनआईए के अनुसार संगठन चैरिटी और वेलफेयर गतिविधियों के नाम पर देश-विदेश से फंड जुटाकर उसे आतंक और अलगाववादी गतिविधियों में इस्तेमाल कर रहा था.

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एनआईए का कहना है कि संगठन देश और विदेश से चैरिटी के नाम पर फंड इकट्ठा करता था (Photo- Representational)
एनआईए का कहना है कि संगठन देश और विदेश से चैरिटी के नाम पर फंड इकट्ठा करता था (Photo- Representational)

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन स्थानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से जुड़े टेरर फंडिंग के एक मामले में कश्मीर घाटी के श्रीनगर और शोपियां जिलों में की गई. यहां से कई संदिग्ध वित्तीय दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बरामद किए गए हैं.

एनआईए के मुताबिक, बरामद सामग्री जमात-ए-इस्लामी और उससे जुड़े ट्रस्टों तथा संगठनों की गतिविधियों से संबंधित हो सकती है. एजेंसी इस मामले में RC-03/2021/NIA/DLI केस के तहत जांच कर रही है.

जांच एजेंसी ने बताया कि उसकी अब तक की जांच में सामने आया है कि जमात-ए-इस्लामी घाटी और देश के अन्य हिस्सों में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से फंड जुटाने में शामिल थी. एनआईए का कहना है कि संगठन देश और विदेश से चैरिटी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर धन एकत्र करता था, लेकिन बाद में उसी धन का इस्तेमाल अलगाववादी और हिंसक गतिविधियों में किया जाता था.

एनआईए के अनुसार यह फंडिंग नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था और जुटाई गई रकम को प्रतिबंधित आतंकी संगठनों तक पहुंचाया जाता था. जांच में संगठन के तार हिज़्बुल मुजाहिदीन समेत अन्य आतंकी संगठनों से भी जुड़े पाए गए हैं.

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एजेंसी का यह भी कहना है कि जमात-ए-इस्लामी कश्मीरी युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और उन्हें संगठन से जोड़ने का काम कर रही थी. जांच में यह भी सामने आया कि युवाओं को रुकुन सदस्य के रूप में भर्ती कर अलगाववादी गतिविधियों में शामिल किया जाता था.

एनआईए ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और अलगाववादी गतिविधियों को खत्म करने के लिए जांच लगातार जारी रहेगी. एजेंसी का लक्ष्य संगठन के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करना और आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगाना है.

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