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योगेश्वर दत्तः ओलंपिक में जीत से बिग बॉस के घर तक रहा जलवा, अब सियासी पिच पर

बरोदा विधानसभा उपचुनाव के लिए सियासी अखाड़े में योगेश्वर दत्त कितना दम दिखा पाते हैं ये तो रिजल्ट आने पर पता चलेगा. लेकिन वह ओलंपिक से लेकर बिग बॉस के घर तक झंडा फहरा चुके हैं. उन्होंने 2012 में लंदन ओलंपिक की कुश्ती प्रतियोगिता के 60 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वजन वर्ग में देश को कांस्य पदक दिलाया था.

सियासी अखाड़े में योगेश्वर दत्त (फाइल फोटो) सियासी अखाड़े में योगेश्वर दत्त (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2012 में लंदन ओलंपिक में जीता था कांस्य पदक
  • 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में जीते थे गोल्ड मेडल
  • 2019 के विधानसभा चुनाव में भी लड़े थे चुनाव

सियासी अखाड़े में दांवपेच आजमा रहे योगेश्वर दत्त के सामने ओलंपिक के बाद अब राजनीतिक चैंपियन बनने की चुनौती है. कांग्रेस और इनेलो का मजबूत गढ़ माने जाने वाले सोनीपत जिले की बरोदा विधानसभा सीट से योगेश्वर दत्त चुनावी अखाड़े में उतरे हैं. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित योगेश्वर दत्त पिछले चुनाव में भी इस सीट से मैदान में थे, लेकिन उन्हें तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था. इस बार फिर से बीजेपी ने टिकट देकर उन्हें चुनावी अखाड़े में उतारा है, जहां उन पर अपनी पार्टी के लिए खाता खोलने की जिम्मेदारी है. 

उपचुनाव के लिए सियासी अखाड़े में योगेश्वर दत्त कितना दम दिखा पाते हैं ये तो रिजल्ट आने पर पता चलेगा. लेकिन वह ओलंपिक से लेकर बिग बॉस के घर तक झंडा फहरा चुके हैं.

उन्होंने 2012 में लंदन ओलंपिक की कुश्ती प्रतियोगिता के 60 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वजन वर्ग में देश को कांस्य पदक दिलाया था. उस दौरान योगेश्वर दत्त ने उत्तर कोरिया के जांग म्यांग री को रेपेचेज प्ले ऑफ मुकाबले में हराकर ये पदक जीता था. हालांकि 2 नवंबर 1982 को हरियाणा के सोनीपत जिले में जन्मे योगेश्वर दत्त बीजिंग ओलंपिक में पदक जीतने से चूक गए थे.

पद्मश्री से सम्मानित  

योगेश्वर दत्त ने आठ साल की उम्र से ही कुश्ती में हाथ आजमाना शुरू किया था. कुश्ती में बलराज पहलवान उनकी प्रेरणा बने, जो हरियाणा में उन्हीं के गांव से ताल्लुक रखते थे. योगेश्वर दत्त ने अपने कोच रामफाल से कुश्ती की ट्रेनिंग ली और पहलवानी के दांव-पेच सीखे.

अपने करियर में योगेश्वर दत्त कई मेडल जीत चुके हैं. 2003 कॉमनवेल्थ कुश्ती चैम्पियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता. दोहा में हुए 15वें एशियन गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीता. 2006 में विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप की 60 किलो फ्रीस्टाइल में वो पांचवें स्थान पर रहे थे. योगेश्वर दत्त ने 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था. उन्हें 2013 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था.

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हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के ब्रांड एम्बेसडर योगेश्वर दत्त की शादी शीतल से हुई है. शीतल हरियाणा में कांग्रेस नेता जयभगवान शर्मा की इकलौती बेटी हैं. हरियाणा में पिछले विधानसभा चुनावों में बीजेपी का दामन थामने वाले योगेश्वर दत्त ने एक बार aajtak.in से बातचीत में कहा था कि वैसे तो पूरा हरियाणा हमारा है लेकिन बरोदा हमारी जन्मभूमि है. हम बीजेपी में एक कार्यकर्ता के तौर पर आए हैं, पार्टी जो भी आदेश देगी उसे हम स्वीकार करेंगे. 

बीजेपी के लिए खाता खोलने की चुनौती

योगेश्वर दत्त जिस बरोदा विधानसभा सीट से उप चुनाव के लिए मैदान में हैं उस पर कांग्रेस-इनेलो का कब्जा रहा है. बरोदा को कांग्रेस और इनेलो का मजबूत गढ़ माना जाता है. बीजेपी इस सीट पर कभी खाता नहीं खोल सकी है. यही वजह है कि 2014 में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी यहां से कांग्रेस से श्रीकृष्णा हुड्डा को मात नहीं दे सकी. हुड्डा इस सीट से लगातार तीसरी बार विधायक बने. 

कांग्रेसी गढ़ में खाता खोलने का बीजेपी का दांव (फोटो-ट्विटर/@DuttYogi)

 

बरोदा विधानसभा सीट पर लंबे समय तक इनेलो का कब्जा रहा है. इनेलो 1977 से लेकर 2005 तक एक भी चुनाव नहीं हारी. इस सीट पर जाट, ब्राह्मणों और फिर दलितों का दबदबा रहा है. वहीं योगेश्वर दत्त ब्राह्मण समाज से आते हैं. यहां कांग्रेस और इनेलो के बीच ही ज्यादातर मुकाबले रहे हैं. 

2014 का नतीजा

विधानसभा चुनाव 2019 में बरोदा सीट से कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा ने जीत दर्ज की थी और बीजेपी के योगेश्वर दत्त को 4840 वोटों से हरा दिया. कांग्रेस के कृष्ण हुड्डा को 50530 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर रहे इनेलो के डॉ कपूर सिंह नरवाल को 45347 वोट मिले थे.


 

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