गुजरात के दाहोद जिले के लिमडी नगर में इस बार गणेशोत्सव बेहद खास बन गया है. हर साल की तरह गणपति बप्पा का भव्य आगमन हुआ. इस बार श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का सबसे बड़ा विषय रहे 'लिमडी चा राजा'. इसकी वजह भी खास है. बप्पा की इस भव्य प्रतिमा को मुंबई के प्रसिद्ध 'लालबागचा राजा' से जुड़े मूर्तिकार संतोष कांबली दादा ने अपने हाथों से तैयार किया है.
लिमडी बाल गणेश मित्र मंडल की इस पहल के बाद मुंबई के मशहूर लालबागचा राजा की झलक अब गुजरात के लिमडी नगर में भी दिखाई दे रही है. गणपति बप्पा के आगमन के दौरान पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला. ढोल-नगाड़ों की गूंज और 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारों के बीच बप्पा की भव्य शोभायात्रा निकाली गई.
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जैसे ही 'लिमडी चा राजा' की प्रतिमा सुभाष चौक पहुंची, वहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. दाहोद के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में गणेश भक्त बप्पा के दर्शन के लिए पहुंचे. पूरा इलाका भक्ति और उत्साह के रंग में रंगा नजर आया.
इस भव्य आयोजन में केवल गणपति की प्रतिमा ही आकर्षण का केंद्र नहीं रही, बल्कि शोभायात्रा के दौरान आयोजित विशेष कार्यक्रमों ने भी लोगों का ध्यान खींचा. आगमन समारोह में फायर शो, कांतारा थीम और लकड़ी से जुड़े साहसिक व रोमांचक करतब प्रस्तुत किए गए. इन प्रस्तुतियों को देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए और श्रद्धालुओं ने जमकर उत्साह दिखाया.
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हालांकि आयोजन का सबसे खास और भावुक कर देने वाला पल तब आया, जब शेषनाग के विशेष स्वरूप में गणपति बप्पा की भव्य आरती की गई. इस अलौकिक और भक्तिमय दृश्य ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया. आरती के दौरान पूरा परिसर भक्ति के माहौल में डूब गया.

श्रद्धालुओं ने 'लिमडी चा राजा' के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की. आयोजकों का कहना है कि इस बार उनका प्रयास लिमडी के गणेशोत्सव को एक अलग पहचान देने का था. इसी सोच के तहत मुंबई के प्रसिद्ध मूर्तिकार संतोष कांबली दादा से बप्पा की प्रतिमा तैयार कराई गई.
आयोजक भविन पंचाल, बालाजी पवार और व्रज पंचाल ने इस आयोजन को लेकर अपनी खुशी जाहिर की. वहीं मूर्तिकार संतोष कांबली दादा ने भी प्रतिमा निर्माण और इस विशेष आयोजन से जुड़े अनुभव शेयर किए. मुंबई के लालबागचा राजा जैसी भव्यता की झलक अब लिमडी में भी दिखाई दे रही है. 'लिमडी चा राजा' के आगमन ने पूरे नगर को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया है और गणेशोत्सव को इस बार एक खास पहचान दे दी है.