गुजरात के आणंद जिले में एक प्रेम कहानी अब कानूनी पचड़े में फंस गई है. फेसबुक पर शुरू हुआ रिश्ता, शादी और दो बच्चों का परिवार आज डिपोर्टेशन की आशंका के बीच खड़ा है. यह मामला लांभवेल गांव के रहने वाले तरुण कुमार पटेल और बांग्लादेश की काजल (काजुली) से जुड़ा है. करीब 12 से 15 साल पहले फेसबुक के जरिए दोनों की मुलाकात हुई थी. धीरे-धीरे यह दोस्ती प्रेम में बदल गई. काजल ने बताया था कि उसके पिता उसकी शादी जबरन किसी और से कराना चाहते थे, जिसके चलते वह ढाका में अपने रिश्तेदार के घर रहने चली गई और वहीं एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करने लगी.
इसी दौरान उसने पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की, जिसमें उसने लगभग 13 हजार रुपये खर्च किए, लेकिन एजेंट की धोखाधड़ी के कारण उसे पासपोर्ट नहीं मिल सका. हालात और दबाव के चलते काजल ने 2016 में जोखिम उठाकर अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आने का फैसला किया. भारत आने के बाद वह सबसे पहले कोलकाता पहुंची और फिर आणंद आ गई. यहां आने के बाद तरुण और काजल ने हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह कर लिया. काजल ने धर्म परिवर्तन भी किया और पूरी तरह भारतीय संस्कृति में ढल गई. वह मंदिरों में जाती थी, पूजा-पाठ करती थी और अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रही थी.
फेसबुक से शुरू हुई प्रेम कहानी अब पहुंची कानूनी संकट तक
इस दंपत्ति के दो बच्चे हैं, जिनमें 8 साल का बेटा ध्यान और 2 साल का बेटा अर्श शामिल हैं. परिवार लंबे समय से सामान्य जीवन जी रहा था, लेकिन हाल ही में पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थिति बदल गई. जानकारी के अनुसार, बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान काजल ने अपनी बीमार मां से फोन पर बात की थी, जिसे पुलिस ने ट्रेस कर लिया. इसके बाद 2 जून की रात पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और डिपोर्टेशन की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई.
फिलहाल काजल को आणंद के नारीगृह में रखा गया है. इस कार्रवाई के बाद परिवार पर संकट खड़ा हो गया है और बच्चे अपनी मां के लिए परेशान हैं. पति तरुण कुमार पटेल का कहना है कि पिछले 15 दिनों से उनके बच्चे मां के लिए बिलख रहे हैं. उन्होंने गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी से मानवीय आधार पर अपील की है कि उनकी पत्नी को डिपोर्ट न किया जाए. उनका कहना है कि काजल ने हिंदू धर्म अपनाया है और अगर उसे बांग्लादेश भेजा गया तो उसकी जान को खतरा हो सकता है.
तरुण ने केंद्र और राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए काजल को भारत में रहने की अनुमति दी जाए ताकि उनका परिवार टूटने से बच सके. वहीं आणंद के पुलिस अधीक्षक जी जी जसाणी ने बताया कि महिला अवैध रूप से भारत में रह रही थी और उसके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं थे. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है.
पुलिस का कहना, महिला के पास नहीं थे वैध दस्तावेज
इस बीच यह मामला अब केवल कानूनी नहीं बल्कि मानवीय पहलू से भी देखा जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में अदालतें कई बार मानवीय आधार पर राहत पर विचार करती हैं ताकि परिवार अलग न हो. फिलहाल यह मामला डिपोर्टेशन प्रक्रिया और कानूनी निर्णय के बीच फंसा हुआ है, और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और गृह मंत्रालय इस पर क्या अंतिम फैसला लेते हैं.