गुजरात में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है. डेडियापाडा से विधायक चैतर वसावा को वन विभाग के कर्मचारियों पर हमला करने के मामले में अदालत ने दोषी ठहराते हुए 7 साल की जेल की सजा सुनाई है. नर्मदा की अदालत के इस फैसले के बाद उनके विधायक पद पर भी संकट खड़ा हो गया है. अदालत ने चैतर वसावा की पत्नी शकुंतला वसावा समेत कुल 9 लोगों को दोषी मानते हुए 7 साल कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. इस अदालती फैसले के तुरंत बाद सभी दोषियों को राजपीपला जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
यह पूरा विवाद नवंबर 2023 का है. नर्मदा जिले के डेडियापाडा इलाके में वन विभाग की जमीन पर कुछ स्थानीय किसान खेती कर रहे थे. वन विभाग की टीम ने इसे अवैध बताते हुए काम रुकवा दिया था. इसी मुद्दे पर बातचीत करने के लिए चैतर वसावा ने वन विभाग के कर्मचारियों को अपने घर बुलाया था. आरोप है कि वहां बातचीत के दौरान बहस इतनी बढ़ गई कि वन कर्मियों के साथ जमकर मारपीट की गई. उन्हें डराने के लिए हवा में एक राउंड गोली भी चलाई गई. इतना ही नहीं, उन कर्मचारियों से मोटी फिरौती भी मांगी गई थी.
धमकी देकर जबरन ऑनलाइन ट्रांसफर कराए थे रुपये
मामले की जांच में सामने आया कि घटना के अगले ही दिन चैतर वसावा के सहयोगियों ने कर्मचारियों से कुल 60 हजार रुपये की रंगदारी मांगी थी. जब वन कर्मियों के पास नकद पैसे नहीं मिले, तो उन्होंने एटीएम से पैसे निकालने की कोशिश की. वहां भी बात नहीं बनने पर उन्होंने अपने सीनियर अधिकारी को फोन किया. इसके बाद उस अधिकारी ने ऑनलाइन माध्यम से 30-30 हजार रुपये ट्रांसफर किए. अदालत में यह बैंक ट्रांजैक्शन सजा दिलाने के लिए सबसे मजबूत सबूत साबित हुआ. गवाहों और पक्के सबूतों को देखते हुए कोर्ट ने इन सभी 9 लोगों को सीधे जेल भेज दिया, जिनमें 5 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल हैं.
सजा मिलने के बाद गुजरात में सियासी घमासान तेज
अदालत के फैसले के बाद गुजरात की राजनीति भी गरमा गई है. भाजपा सांसद धवल पटेल ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि गुजरात में कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई होना तय है और किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता. उन्होंने दावा किया कि चैतर वसावा के खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज रहे हैं और अदालत ने उपलब्ध सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया है.
वहीं आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया ने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताया. उन्होंने कहा कि चैतर वसावा आदिवासी समाज के मुद्दे लगातार उठाते रहे हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया है. गोपाल इटालिया ने कहा कि पार्टी इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेगी और कानूनी लड़ाई जारी रखेगी.
दूसरी ओर कांग्रेस विधायक अनंत पटेल ने भी फैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेताओं के खिलाफ अक्सर मुकदमे दर्ज किए जाते हैं. अनंत पटेल ने कहा कि चैतर वसावा के मामले को भी इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए और इसकी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चैतर वसावा ने कहा कि वे न्यायपालिका का सम्मान करते हुए खुद सरेंडर करने आए हैं. उन्होंने साफ किया कि उनका परिवार आदिवासी समाज, युवाओं और पीड़ितों के हक के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष करता रहेगा. इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही गई है. फिलहाल माहौल को शांत रखने के लिए दोषियों को किसी दूसरे जिले की जेल में ट्रांसफर करने की अर्जी भी कोर्ट में दी गई है.