अहमदाबाद में पुलिस विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि अहमदाबाद रूरल के चांगोदर पुलिस स्टेशन में तैनात महिला PSI सोनल राठौड़ ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर एक दिव्यांग व्यक्ति की थाने के अंदर बेरहमी से पिटाई की.
मामले के सामने आने और सोशल मीडिया पर चर्चा तेज होने के बाद अहमदाबाद रूरल के पुलिस अधीक्षक ने महिला PSI सोनल राठौड़ को सस्पेंड कर दिया है. साथ ही उनके खिलाफ गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन में FIR भी दर्ज की गई है.
पीड़ित 57 वर्षीय गोपालभाई दर्जी अहमदाबाद के पंचवटी इलाके के पास एक छोटा गल्ला चलाते हैं. उनकी दृष्टि कमजोर है और वे दिव्यांग हैं. घटना के बाद उन्होंने महिला अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
वेफर के पैकेट से शुरू हुआ पूरा विवाद
जानकारी के मुताबिक, चार दिन पहले गोपालभाई अपने गल्ले पर मौजूद थे. इसी दौरान पास के गुलबाई टेकरा इलाके से एक बच्चा वहां पहुंचा और कथित तौर पर बिना पैसे दिए वेफर का पैकेट लेकर जाने की कोशिश करने लगा.
पैकेट फटने की आवाज सुनकर गोपालभाई सतर्क हो गए और उन्होंने बच्चे को पकड़ लिया. इस दौरान बच्चे को सामान्य चोट लगने की बात सामने आई. बाद में बच्चे ने पूरी घटना अपने पिता प्रतीक को बताई.
आरोप है कि इसके बाद बच्चे के पिता गोपालभाई के गल्ले पर पहुंचे और उनके साथ गाली-गलौज की. पीड़ित का दावा है कि इसी दौरान उन्होंने अपनी पत्नी और चांगोदर पुलिस स्टेशन की PSI सोनल राठौड़ का नाम लेकर उन्हें धमकाया. बाद में गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन की मदद से गोपालभाई को थाने ले जाया गया.
थाने के अंदर पिटाई का आरोप
गोपालभाई दर्जी का आरोप है कि उन्हें दोपहर में गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन लाया गया और कई घंटे तक बैठाकर रखा गया. इसके बाद वहां महिला PSI सोनल राठौड़ पहुंचीं.
पीड़ित के अनुसार, महिला अधिकारी ने आते ही उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और फिर लात-घूंसों से मारपीट की. उनका आरोप है कि वे जमीन पर गिर गए, लेकिन इसके बावजूद पिटाई नहीं रुकी.
गोपालभाई का कहना है कि महिला PSI ने उन्हें लकड़ी से भी मारा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय थाने में मौजूद अन्य पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे और किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की.
अस्पताल पहुंचे, फिर सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी
मारपीट में घायल होने के बाद गोपालभाई इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे. वहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्होंने अपने साथ हुई घटना की जानकारी लोगों को दी.
धीरे-धीरे यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. लोगों ने दिव्यांग व्यक्ति के साथ हुई कथित बर्बरता पर नाराजगी जताई और महिला PSI के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी.
सोशल मीडिया और जनदबाव बढ़ने के बाद पुलिस विभाग पर भी कार्रवाई का दबाव बढ़ा. मामला सार्वजनिक होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने इसकी गंभीरता से जांच शुरू की.
माफी मांगने पहुंचीं महिला PSI
घटना के अगले दिन महिला PSI सोनल राठौड़ कथित तौर पर गोपालभाई के घर पहुंचीं. बताया जा रहा है कि उन्होंने मामले को सुलझाने और समझौता करने की कोशिश की.
पीड़ित के अनुसार, महिला अधिकारी ने अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी. हालांकि गोपालभाई ने समझौते से इनकार कर दिया और कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना.
इसके बाद उन्होंने गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन में महिला PSI के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी.
ACP ने बताया क्या हुई कार्रवाई
अहमदाबाद बी डिवीजन के ACP एचएम कणसागरा ने बताया कि जब महिला PSI ने थाने के भीतर दिव्यांग व्यक्ति के साथ मारपीट की, तब वहां मौजूद एक कांस्टेबल ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी.
ACP के मुताबिक, जब महिला अधिकारी नहीं मानीं तो गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर एसआर बावा ने हस्तक्षेप किया और उन्हें कानून हाथ में न लेने की सलाह दी. इसके बाद महिला PSI वहां से चली गई थीं.
उन्होंने बताया कि घटना की रिपोर्ट इंस्पेक्टर एसआर बावा ने अहमदाबाद रूरल SP को भेजी थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई करते हुए महिला PSI सोनल राठौड़ को निलंबित कर दिया गया.
राइट टू डिसेबिलिटी एक्ट के तहत होगी कार्रवाई
ACP एचएम कणसागरा ने कहा कि गोपालभाई की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली गई है. मामले में राइट टू डिसेबिलिटी एक्ट समेत संबंधित कानूनी धाराओं के तहत जांच की जा रही है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोनल राठौड़ का कार्यक्षेत्र अहमदाबाद रूरल का चांगोदर पुलिस स्टेशन था. इसके बावजूद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किए बिना अपना क्षेत्र छोड़ा और अहमदाबाद शहर के गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन पहुंच गईं.
अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कानून हाथ में लेना नियमों के खिलाफ है. इसी वजह से महिला PSI के खिलाफ विभागीय और कानूनी दोनों स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है. अब पूरे मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी.