पौने तीन साल बाद अहमदाबाद इस्कॉन ब्रिज दुर्घटना मामले में आरोपी तथ्य पटेल को सुप्रीम कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है. इस संबंध में लिखित आदेश पारित करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने तथ्य पटेल को बोनाफाइड दिखाने के लिए निचली अदालत में कुछ राशि जमा करने को कहा था. इसके जवाब में तथ्य पटेल के वकील ने अदालत के समक्ष गुजरात सरकार की ओर से पेश हुए सरकारी वकील को राय देने का प्रस्ताव रखा था.
गुजरात सरकार के वकील ने प्रत्येक मृतक के लिए 10 लाख रुपये की राशि का सुझाव दिया था. तथ्य पटेल के वकील ने तुरंत इस पर सहमति जता दी. अंततः सुप्रीम कोर्ट ने तथ्य पटेल को निचली अदालत में 1 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है. यह उल्लेखनीय है कि यह राशि एकमुश्त है.
2023 का वह भयावह इस्कॉन ब्रिज हादसा
बता दें कि साल 2023 में अहमदाबाद के इस्कॉन ब्रिज पर एक भयावह हादसा हुआ था. आरोपी तथ्य पटेल ने लापरवाही से तेज रफ्तार से गाड़ी चलाई और मौके पर मौजूद लोगों व वाहनों को टक्कर मार दी.
इस हादसे में कुल 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए. हादसे के महज 7 दिन बाद तथ्य पटेल के खिलाफ निचली अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया. फिलहाल अहमदाबाद ग्रामीण सत्र न्यायालय में उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है, जिसमें घटना के चश्मदीदों की जांच पूरी हो चुकी है.
मुकदमा और गवाहों की स्थिति
इस मामले में कुल 191 गवाह हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 191 गवाहों में से लगभग 29 गवाहों की जांच पूरी हो चुकी है, बाकी गवाहों की जांच अभी बाकी है. तथ्य पटेल पर आईपीसी की धारा 304 के तहत आरोप लगाया गया है, लेकिन अभी तक उसे दोषी नहीं पाया गया है.
मृतकों के परिवार को मुआवजे के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि मुकदमा अभी चल रहा है, इसलिए मुआवजे पर फैसला इससे प्रभावित हो सकता है.
निचली अदालत और HC से खारिज हुई थी अर्जी
इस्कॉन ब्रिज दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए अहमदाबाद की निचली अदालत और गुजरात हाईकोर्ट ने पहले भी कई बार तथ्य पटेल की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं.
अपराध की गंभीरता और समाज पर इसके प्रभाव को देखते हुए कानूनी राहत नहीं दी गई थी. लेकिन अब घटना के 2 साल और 10 महीने बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी है, जिसके कारण यह मामला एक बार फिर देश और राज्य भर में चर्चा का केंद्र बन गया है.