साउथ दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास शनिवार को पांच मंजिला इमारत ढह गई थी. इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं. हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य जारी है. जेपीएनएटीसी (जेपी नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर) के अनुसार, इमारत गिरने की घटना में कुल 10 घायलों को अस्पताल लाया गया. इनमें से तीन लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है.
वहीं छह अन्य घायल मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर है और उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. अस्पताल प्रशासन ने बताया कि दो लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था. घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है. पुलिस, दमकल विभाग और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं. मलबे में अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए सर्च ऑपरेशन जारी है.
ढहते हुए दूसरी इमारत पर जा गिरी थी बिल्डिंग
बता दें कि शनिवार को साकेत मेट्रो स्टेशन के पास महरौली थाना इलाके के सैदुलाजाब में पांच मंजिला इमारत ढह गई थी. यह इमारत पास की ही एक दूसरी बिल्डिंग पर जा गिरी, जिसके नीचे बनी कैंटीन में खाना खा रहे कुछ छात्र मलबे में दब गए थे. घटना की जानकारी मिलते ही अफरा-तफरी मच गई. फायर डिपार्टमेंट तथा एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें मौके पर पहुंची और रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया.
बचाव दल ने 10 लोगों को सुरक्षित निकाला
राहत बचाव दल मलबे से 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जो पांच मंजिला बिल्डिंग गिरी है वह एक कमर्शियल इमारत थी. इसके अंदर कई दफ्तर थे, लेकिन शनिवार होने की वजह से सभी ऑफिस बंद थे. गनीमत रही कि शनिवार बंद होने से एक बड़ी संख्या में लोग इस हादसे की जद में नहीं आए.
हादसे में ध्वस्त हुए कैंटीन
जब यह इमारत गिरी, तो इसका मलबा बगल वाली बिल्डिंग पर जा गिरा. इस बगल वाली बिल्डिंग में एक लाइब्रेरी चलती है, जहां विदेश से एमबीबीएस (MBBS) करके लौटे छात्र भारत की मेडिकल परीक्षा की तैयारी के लिए पढ़ाई कर रहे थे. हादसे के दौरान ज्यादातर छात्र वक्त रहते लाइब्रेरी से बाहर भागने में कामयाब रहे. असली मुसीबत लाइब्रेरी के ठीक नीचे आई, जहां एक महिला कैंटीन चलाती है. बिल्डिंग गिरते ही यह पूरी कैंटीन मलबे के ढेर में तब्दील हो गई. हादसे के समय कैंटीन के अंदर कुछ छात्र डिनर कर रहे थे, जो इस मलबे में दब गए थे.
धमाके जैसी आवाज, फिर धूल-मिट्टी का गुबार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरने से कुछ क्षण पहले तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी. आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि किसी जनरेटर में विस्फोट हुआ है, लेकिन इसके तुरंत बाद धूल, मिट्टी और मलबे का विशाल गुबार उठने लगा. इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि वह इमारत के पीछे रहता है और अचानक इतनी तेज आवाज आई कि कुछ समय के लिए समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ है. लोगों ने एहतियात के तौर पर अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर लीं. पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिस इमारत का ढांचा ढहा है, उसके बेसमेंट पर एक कोचिंग संस्थान संचालित होता था, जबकि ऊपरी मंजिलों पर निर्माण कार्य चल रहा था.
हादसे के बाद इमारत पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह ढह गई और कुछ ही सेकंड में विशाल मलबे के ढेर में तब्दील हो गई. टूटे हुए खंभे, कंक्रीट और अन्य निर्माण सामग्री पूरे इलाके में बिखर गई. संकरी सड़क पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए, जबकि पुलिस और बचाव दल लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने में जुटे रहे. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मलबे के नीचे लोगों के फंसे होने की खबर फैलते ही स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में जुट गए. कई लोग मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट की मदद से मलबे के बीच तलाश करते दिखाई दिए.
आसपास के इलाकों की भी जांच कर रहा प्रशासन
दिल्ली अग्निशमन सेवा को शाम 7:44 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही सात दमकल गाड़ियों को मौके पर रवाना किया गया. दमकल कर्मियों, पुलिस और अन्य आपदा राहत एजेंसियों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया. एंबुलेंस भी मौके पर तैनात की गईं ताकि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके. स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास की अधिकांश इमारतें सुरक्षित हैं और हादसे का प्रभाव मुख्य रूप से ढही हुई इमारत तथा उससे सटे कुछ छोटे ढांचों तक सीमित रहा. फिर भी, प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के क्षेत्र की जांच शुरू कर दी है ताकि किसी अन्य भवन को संभावित खतरे का आकलन किया जा सके.