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ऑटो रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए ड्रेस की अनिवार्यता को दिल्ली HC में चुनौती

ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए वर्दी अनिवार्य किए जाने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से रूख स्पष्ट करने के लिए कहा है.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऑटो-ड्राइवरों के लिए ड्रेस अनिवार्य करने संबंधी याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से रूख स्पष्ट करने के लिए कहा है. परमिट शर्तों और मोटर वाहन नियमों में इस मुद्दे पर अस्पष्टता को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील को यह स्पष्ट करने के लिए कहा कि क्या राष्ट्रीय राजधानी में ऑटो चालकों के लिए खाकी या ग्रे रंग की वर्दी निर्धारित है.

चालकों के एक संघ 'चालक शक्ति' की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही थी. इसमें ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए वर्दी अनिवार्य किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है. इसमें आरोप लगाया गया है कि इस तरह की अनिवार्यता संविधान का उल्लंघन है.

कोर्ट ने अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा कि वर्दी के पीछे का विचार इसे पहनने वालों की पहचान से है. याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि वर्दी नहीं पहनने पर चालकों के खिलाफ 20 हजार रुपये का भारी-भरकम चालान करने का नियम थोपा जा रहा है. जबकि इस संबंध में अभी तक कानून स्पष्ट नहीं है.

इसमें कहा गया है कि ड्यूटी पर ऑटो चालकों द्वारा पहनी जाने वाली वर्दी के रंग के बारे में अभी पूरी तरह अस्पष्टता है, क्योंकि दिल्ली मोटर वाहन नियम-1993 का नियम 7 खाकी रंग को निर्धारित करता है, लेकिन अधिकारियों ने निर्धारित परमिट की शर्तों में ग्रे रंग को अनिवार्य किया है.

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याचिका में ये भी कहा गया है कि खाकी और ग्रे रंग के दर्जनों शेड्स हैं. इसमें किसी खास शेड का जिक्र नहीं है, ऐसे में कानून प्रवर्तन अधिकारी जिसके खिलाफ चाहें, उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं. हाईकोर्ट इस मामले में अब 17 मई को सुनवाई करेगा. 

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