दिल्ली सरकार ने खस्ताहाल एमसीडी को कड़की से निकालने के लिए अहम फैसला लिया है. मंगलवार को लिए गए फैसले में केजरीवाल कैबिनेट ने तीनों नगर निगमों को 374 करोड़ रुपये देने का फैसला लिया है. ये रकम म्यूनिसिपल रिफॉर्म फंड के तहत दिए जाएंगे.
एमसीडी को सुधारों के मिलेंगे पैसे
सरकार ने को सुधारों के लिए पैसे दिए हैं. बात अटपटी इसलिए लग रही है क्योंकि एमसीडी इसलिए सवालों में रहती है क्योंकि उसने आर्थिक सुधार से जुड़े कदम उठाने शुरू ही नहीं किए हैं. लेकिन दिल्ली कैबिनेट ने ये फैसला लिया है कि इस वित्तीय वर्ष 2015-16 में तीनों नगर निगमों को इस हेड के तहत पैसा दिया जाएगा.
पिछले साल हड़ताल पर चले गए थे एमसीडी कर्मचारी
के रवैये में ये बदलाव कोर्ट के दवाब के चलते दिखाई दे रहा है. पिछले साल जब कई महीने तक वेतन नहीं मिला था तो नगर निगम के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे. दिल्ली में गंदगी का अंबार लग गया और मामला पहुंचा दिल्ली हाई कोर्ट में. हाई कोर्ट में पिछली बार जब सुनवाई हुई तब दिल्ली सरकार की ओर से उनके वकील राहुल मेहरा ने इस बात के लिए हामी भर दी थी कि तीनों एमसीडी को दिल्ली सरकार म्यूनिसिपल रिलीफ फंड मुहैया कराएगी.
इस पर भी बात हुई कि अगर पैमाना सिर्फ कामकाज को ही बनाया जाता है तो दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के अलावा दोनों एमसीडी को ये फंड नहीं मिल सकता. इसलिए दिल्ली कैबिनेट ने उत्तरी और पूर्वी नगर निगम के खस्ताहाल आर्थिक हालत को देखते हुए एक साल तक इन दोनों नगर निगम को राहत देने का फैसला किया.
इस फॉर्मूले से जारी होगा फंड
दिल्ली कैबिनेट ने जो राशि तय की है, उसमें नॉर्थ एमसीडी के लिए 145 करोड़, ईस्ट एमसीडी के लिए 110 करोड़ तो साउथ एमसीडी को 118 करोड़ रुपये मिलेंगे. फंड के लिए जो फॉर्मूला तय किया गया है उसमें 50 फीसदी आबादी के लिए 25 फीसदी क्षेत्रफल और 25 फीसदी जनसंख्या घनत्व के हिसाब से फंड मिला है. हालांकि दिल्ली में अगले साल चुनाव होने हैं इसलिए इस फंड से कर्मचारियों को कितना फायदा होगा और कौन सी पार्टी इस पर सियासी रोटी सेंक पाएगी, ये सब आने वाले महीनों में तय हो जाएगा.