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दिल्ली में 93,000 स्ट्रीटलाइट्स होंगी स्मार्ट, 5 साल में ₹300 करोड़ की बिजली बचत का टारगेट

दिल्ली सरकार 93,000 स्ट्रीटलाइट्स को स्मार्ट LED में बदलने जा रही है, जिससे 5 साल में करीब ₹300 करोड़ की बिजली बचत का लक्ष्य है. यह पूरा प्रोजेक्ट EMI और परफॉर्मेंस आधारित मॉडल पर होगा, जिसमें रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल सेंटर भी बनाया जाएगा.

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473 करोड़ रुपये की योजना के तहत दिल्ली में 93,000 स्ट्रीटलाइट्स को स्मार्ट बनाया जाएगा. (Photo: ITG)
473 करोड़ रुपये की योजना के तहत दिल्ली में 93,000 स्ट्रीटलाइट्स को स्मार्ट बनाया जाएगा. (Photo: ITG)

दिल्ली सरकार ने राजधानी की करीब 93,000 स्ट्रीटलाइट्स को स्मार्ट LED सिस्टम में बदलने का बड़ा फैसला लिया है, जिससे अगले पांच साल में लगभग 300 करोड़ रुपये तक बिजली खर्च में बचत का लक्ष्य रखा गया है. इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 473.24 करोड़ रुपये है. इसकी जानकारी मंगलवार को PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने दी, जिसमें बताया गया कि पूरा प्रोजेक्ट EMI मॉडल पर काम करेगा और लाइट्स की परफॉर्मेंस के आधार पर भुगतान किया जाएगा.

इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसका पेमेंट का तरीका है. सरकार ठेकेदार को पूरा पैसा एक साथ देने के बजाय हर महीने किस्त यानी ईएमआई (EMI) के रूप में भुगतान करेगी. यह EMI भी इस बात पर तय होगी कि लाइटें सड़क पर सही से काम कर रही हैं या नहीं. प्रवेश वर्मा के मुताबिक, अगर लाइटें ठीक से नहीं चलेंगी, तो पेमेंट में कटौती की जा सकती है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि ठेकेदार लाइटों के रख-रखाव में कोई लापरवाही न बरत सके.

मौसम के हिसाब से कम-ज्यादा होगी रोशनी

यह प्रोजेक्ट दिल्ली में पीडब्ल्यूडी के करीब 1,400 किलोमीटर लंबे रोड नेटवर्क पर लागू किया जाएगा. इसके तहत पुरानी सोडियम और खराब एलईडी लाइटें हटाए जाएंगे. साथ ही जिन जगहों पर अंधेरा रहता है, वहां रोशनी के लिए 5,000 नए खंभे भी लगाए जाएंगे. इन नई स्मार्ट लाइटों की खासियत यह होगी कि इन्हें मौसम के हिसाब से या जरूरत पड़ने पर धीमा भी किया जा सकेगा. जबकि खराब मौसम में इनकी रोशनी को कंट्रोल रूम से बैठे-बैठे ही बढ़ाया जा सकेगा.

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सरकार ने इसके लिए PWD के मुख्यालय में एक सेंट्रलाइज्ड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाने का फैसला किया है. इस सेंटर में 75 इंच की दो बड़ी स्क्रीन और खास सॉफ्टवेयर लगाए जाएंगे. इसके जरिए दिल्ली भर की सभी 93 हजार लाइटों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग होगी. यानी, कौन सी लाइट जल रही है और कौन सी खराब है, इसकी जानकारी तुरंत हेडक्वार्टर को मिल जाएगी. इसके लिए बकायदा टेंडर जारी कर दिए गए हैं और अगले दो हफ्तों में काम अलॉट कर दिया जाएगा.

वित्त विभाग के मुताबिक, स्मार्ट LED सिस्टम आने से बिजली के खर्च में भारी कमी आएगी और पांच साल में करीब 300 करोड़ रुपये की बचत होगी. सरकार का दावा है कि इस कदम से न सिर्फ बिजली बचेगी, बल्कि दिल्ली की रोशनी व्यवस्था भी पूरी तरह हाईटेक हो जाएगी.
 

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