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दो साल, 532 माओवादी ढेर, 2700 से ज्यादा ने किया सरेंडर... राज्यपाल ने बताई छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की कहानी

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने बजट सत्र में कहा कि राज्य नक्सलवाद के खात्मे की कगार पर है. 2 साल में 532 माओवादी मारे गए, 2704 ने सरेंडर किया. जानिए बस्तर के विकास और 2047 विजन को लेकर राज्यपाल ने क्या कहा. पढ़ें पूरी कहानी.

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छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने अपने भाषण में ये जानकारी दी (फाइल फोटो)
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने अपने भाषण में ये जानकारी दी (फाइल फोटो)

Chhattisgarh Naxal Crackdown: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्यपाल रमेन डेका ने बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि राज्य अब वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद के खात्मे की कगार पर है. पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है. इस दौरान सैकड़ों उग्रवादी मारे गए, हजारों ने आत्मसमर्पण किया और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुईं. राज्यपाल का कहना था कि यह बदलाव छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है.

दो साल का लेखा-जोखा
राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में स्पष्ट आंकड़े रखे. उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 532 माओवादी मारे गए. इसके अलावा 2,704 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया और 2,004 को गिरफ्तार किया गया. सरकार की सख्त कार्रवाई और बेहतर रणनीति के कारण यह संभव हो पाया. उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से नक्सल नेटवर्क कमजोर हुआ है. यह राज्य में शांति स्थापना की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.

सरेंडर और पुनर्वास नीति का असर
राज्यपाल ने कहा कि राज्य की आकर्षक सरेंडर और पुनर्वास नीति का सकारात्मक असर पड़ा है. भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया गया है. सरकार उन्हें आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है. इससे कई युवाओं ने हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाया. उन्होंने कहा कि जब आतंक का साया हटता है, तो विकास की रोशनी खुद-ब-खुद फैलती है और लोगों का जीवन बेहतर होता है.

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‘नियाद नेल्ला नार योजना’
माओवादी प्रभाव से मुक्त हुए दूरस्थ क्षेत्रों में ‘नियाद नेल्ला नार योजना’ के जरिए विकास कार्य तेज किए गए हैं. इस योजना में 17 विभाग मिलकर काम कर रहे हैं. इसके तहत 25 कल्याणकारी योजनाओं और 18 सामुदायिक सुविधाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया जा रहा है. गांवों में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. सरकार का लक्ष्य है कि जिन इलाकों में पहले बंदूक की गूंज थी, वहां अब विकास की आवाज सुनाई दे.

बस्तर में सड़कों और पुलों का बड़ा नेटवर्क
पीटीआई के मुताबिक, राज्यपाल ने बस्तर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया. उन्होंने बताया कि बस्तर में 146 सड़क और पुल परियोजनाओं के लिए 1,109 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. इनमें से कई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि अन्य पर काम जारी है. बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है. पहले जो गांव कटे हुए थे, वे अब मुख्य मार्गों से जुड़ रहे हैं.

मोबाइल टावर और 4G सेवाओं का विस्तार
माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था मजबूत की गई है. कुल 728 मोबाइल टावर चालू किए गए हैं. इसके अलावा 449 टावरों को 4G सेवा से अपग्रेड किया गया है. इससे दूर-दराज के गांवों में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ी है. अब लोग ऑनलाइन सेवाओं, शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा पा रहे हैं. संचार सुविधाओं ने प्रशासन और जनता के बीच दूरी भी कम की है.

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शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
राज्यपाल ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया है. 31 नए प्राथमिक स्कूल और 19 उप-स्वास्थ्य केंद्रों को मंजूरी दी गई है. ‘नियाद नेल्ला नार योजना’ के तहत 11 हजार से ज्यादा बच्चों और महिलाओं का टीकाकरण किया गया. इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार हुआ है. सरकार का कहना है कि विकास का असली लाभ तभी मिलेगा जब शिक्षा और स्वास्थ्य मजबूत होंगे.

आदिवासी संस्कृति को पहचान
छत्तीसगढ़ देश के पहले ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ की मेजबानी करेगा. राज्यपाल ने कहा कि इससे प्रदेश की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी. बस्तर ओलंपिक की सफलता के बाद अब ‘सरगुजा ओलंपिक’ का आयोजन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अब दुनिया बारूद के धुएं के बजाय बस्तर की खूबसूरती देखेगी. खासतौर पर चित्रकूट वॉटर फॉल को वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिश है.

2047 तक विकसित राज्य बनने का लक्ष्य
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने 2047 तक विकसित राज्य बनने का लक्ष्य तय किया है. इसके लिए ‘अंजोर विजन डॉक्यूमेंट’ तैयार किया गया है. सरकार समावेशी विकास और सामूहिक संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है. उनका कहना था कि शांति और विकास साथ-साथ चलते हैं. राज्य अब नई दिशा और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है.

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महिला सशक्तिकरण और वन अधिकार
‘महातारी वंदन योजना’ के तहत लगभग 69 लाख महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में दिए जा रहे हैं. अब तक 24 किस्तों में 15,596 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं. इसके अलावा राज्य वन अधिकार पट्टों के वितरण में देश में पहले स्थान पर है. 4.83 लाख से अधिक व्यक्तिगत और 48,251 सामुदायिक वन अधिकार पट्टे दिए गए हैं. इससे आदिवासी और वनवासियों को कानूनी हक मिला है.

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