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पल-पल बदल रही है हवा: 'बिहार डायरी बिफोर इलेक्शन' पार्ट-9

लोकसभा चुनाव में बिहार से इस बार बेहद दिलचस्‍प नतीजे सामने आ सकते हैं. पहले से यह अनुमान लगाना बेहद कठिन है कि इस बार वोटरों के पोलिंग बूथ पहुंचने तक कौन-सा फैक्‍टर हावी हो जाए. पेश है चुनावी समीकरणों का जायजा लेती 'बिहार डायरी बिफोर इलेक्शन' की नौवीं किस्‍त...

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बिहार (Symbolic Image)
बिहार (Symbolic Image)

लोकसभा चुनाव में बिहार से इस बार बेहद दिलचस्‍प नतीजे सामने आ सकते हैं. पहले से यह अनुमान लगाना बेहद कठिन है कि इस बार वोटरों के पोलिंग बूथ पहुंचने तक कौन-सा फैक्‍टर हावी हो जाए. पेश है चुनावी समीकरणों का जायजा लेती 'बिहार डायरी बिफोर इलेक्शन' की नौवीं किस्‍त...

ये अद्भुत चुनाव है. एक ब्राह्मण की ‘बेटी’ बोलती है कि मोदी कट्टरपंथी हैं और यादव का ‘बेटा’ बोलता है कि मोदी तारणहार हैं. कहता है कि लोकसभा में मोदी को वोट देंगे, विधानसभा में देखा जाएगा.

अजीब बात है. तमाम समीकरण सिर के बल खड़े हो गए हैं. मैं सोच रहा हूं कि इन पढ़ी-लिखी लड़कियों को वाकई कट्टर छवि वाले नेता से दिक्कत है या खाल के नीचे ये भी ब्राह्मण हैं? राजेंद्र यादव होते, तो एक नारी विमर्श बनता ही था. मजे की बात यह कि ऐसा उस बिहार में सुन रहा हूं, जहां जाति के आधार पर शिक्षक संगठन तक बंटे हुए हैं. पूर्वाग्रह से भरा अपना माथा पीटने का मन कर रहा है और लगता है कि जातीय समीकरण ध्वस्त हो गया है. लेकिन सावधान, यह पूरा सच नहीं है.

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मुसहर बेयरा पूछने पर बोलता है कि वह बीजेपी को वोट देगा, ‘सर, देश को बचाना है.’
'क्यों जी, देश को क्या हो गया है?'
'सर, देश को मजबूत बनाना है.'

धानुक बेयरा नीतीश को देगा. 'क्योंजी?'
'सर, हमारे यहां चार चुनाव से उसे ही देते आए हैं, इसीलिए देंगे.'

'तुम क्या हो जी?'
'कुर्मी?'
'किसे दोगे.?'
'सर, हमलोग नीतीश को देते हैं, लेकिन हवा तो मोदी की है.'

(यह विश्लेषण स्वतंत्र पत्रकार सुशांत झा ने लिखा है. वह इन दिनों ‘बिहार डायरी बिफोर इलेक्शन’ के नाम से ये सीरीज लिख रहे हैं.)

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