scorecardresearch
 

'शुक्रवार अवकाश' पर गरमाती जा रही सियासत, बिहार सरकार के दो मंत्री आपस में भिड़े, नीतीश की मुश्किलें बढ़ीं

बिहार के किशनगंज में रविवार की जगह शुक्रवार को अवकाश देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. अभी तक इस मामले को लेकर नीतीश सरकार राजद के अलावा बीजेपी के हमलों का सामना कर रही है. बिहार सरकार के मंत्रियों के आपस में भिड़ने से सीएम नीतीश की मुसीबत बढ़ती जा रही है.

X
शुक्रवार अवकाश को लेकर मंत्री जाम खान (बाएं) और प्रमोद कुमार (दाएं) जुबानी जंग (फाइल फोटो) शुक्रवार अवकाश को लेकर मंत्री जाम खान (बाएं) और प्रमोद कुमार (दाएं) जुबानी जंग (फाइल फोटो)

बिहार में कोई भी ऐसा दिन नहीं जब किसी न किसी मुद्दे पर सियासी बयानबाजी ना हो. ताजा मामला किशनगंज का है, जहां के स्कूलों में रविवार के बजाए जुमे की नमाज के लिए शुक्रवार को अवकाश घोषित कर दिया गया है. इस मामले ने बिहार में सियासी पारा गरम कर दिया है. इस मामले में बिहार सरकार के मंत्री आमने-सामने आ गए हैं.

इस सियासी युद्ध में अब नीतीश कुमार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री सामने आ गए हैं. मंत्री जमा खान ने कहा कि उर्दू स्कूलों में शुक्रवार को ही अवकाश होना चाहिए, क्योंकि यह नियम काफी दिनों से चला आ रहा है. हालांकि जब उनसे पूछा गया कि यह कब से हो रहा है तो वह इसका जवाब नहीं दे पाए. बाद में उन्होंने कहा कि इस पर झूठ-मूठ की सियासत हो रही है.

मंत्री जमा खान के बयान पर कानून मंत्री प्रमोद कुमार ने पलटवार किया कि भारत मजहबी लड़ाई पर नहीं चलता है. उन्होंने कहा कि भारत में संविधान चलता है. रविवार बंद तो रविवार बंद. जब तक नया आदेश नहीं आता है तब तक जो पद्धति बनी हुई है, उसमें छेड़छाड़ किस बात की.

सरकार को निर्देश जारी करने को लिखा पत्र

वहीं अल्पसंख्यक आयोग ने स्कूलों में शुक्रवार को अवकाश को लेकर कहा कि उसने शिक्षा विभाग को तीन पत्र लिखकर यह मांग की है कि शुक्रवार को ही उर्दू स्कूल में अवकाश होती है. सरकार इसे लेकर आदेश जारी करे कि उर्दू स्कूलों में शुक्रवार को ही अवकाश रहेगा.

विभाग ने बताया कि संस्कृत कॉलेजों में प्रतिपदा एवं अष्टमी के दिन अवकाश रहता है. वहीं उर्दू स्कूल में शुक्रवार को अवकाश रहता है ऐसे में समस्या और राजनीति होने का कोई कारण ही नहीं बनता है.

आयोग के सूचना जनसंपर्क अधिकारी फारूकी जमा ने बताया कि आयोग ने सरकार को पत्र लिखा है. निर्देश का इंतजार है. हमने सरकार को भी बताया है कि शुक्रवार को उर्दू स्कूल में अवकाश होता रहा है इसलिए इसे लेकर एक दिशा निर्देश जारी करें ताकि इसमें कोई सियासत ना हो.

संस्कृत कॉलेज का भी कैलेंडर देखना चाहिए: उपेंद्र

जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने 28 जुलाई को ट्वीट कर कहा था कि उर्दू विद्यालयों में छुट्टी- वाकई जरूरी मुद्दा है या अनावश्यक विवाद बनाने की कोशिश. छुट्टी पर आपत्ति करने वाले महानुभावों, आप सभी को पता तो होना चाहिए कि शुक्रवार को सिर्फ उर्दू विद्यालयों में ही अवकाश नहीं होता है, संस्कृत महाविद्यालयों में भी प्रत्येक महीना के प्रतिपदा और अष्टमी को छुट्टी रहती है. इसी के साथ उन्होंने संस्कृत महाविद्यालय का एक कैलेंडर भी जारी करते हुए कहा था कि इस कैलेंडर को आपको देखना चाहिए. 

सरकारी छुट्टियां धर्म को देखकर नहीं होतीं: राकेश सिन्हा

बीजेपी के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने कहा था कि सरकारी छुट्टियां धर्म को देखकर नहीं होती हैं. अगर ऐसा होता है तो यह घोर सांप्रदायिक निर्णय है इस निर्णय को वापस लेना चाहिए.

राकेश सिन्हा ने अपने ट्वीट में टर्की का उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम बहुल देश टर्की में जहां 99% मुसलमान हैं. वहां शुक्रवार की छुट्टी बदलकर रविवार कर दी गई है. भारत में अगर उल्टी गंगा बहाने की कोशिश होगी तो यह संभव नहीं है. अगर ऐसा होता है, तो यह गलत है. सरकार को अविलंब जांच कर जिन लोगों ने निर्णय किया है उस पर कार्रवाई करनी चाहिए.

शरिया कानून के तहत है शुक्रवार को छुट्टी 

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा था कि शुक्रवार को स्कूलों में छुट्टी का नियम ही नहीं है. ये नियम तो शनिवार-रविवार का है. गिरिराज ने कहा,'मैं इसे इस रूप में देखता हूं कि देश में पहले ये बात उत्तर प्रदेश में आई. इसके बाद अब बिहार में यह दिख रहा है. कानून का राज होना चाहिए. कानून में बरसों से आजादी के समय से ही हम रविवार को स्कूलों-ऑफिसों में छुट्टी मनाते हैं. ये शुक्रवार को मनाना उचित नहीं है. ये तो एक संप्रदाय के लिए शरिया के कानून के तहत है.'

मदरसों की संस्कृत कॉलेज से तुलना गलत: सरावगी

बीजेपी के विधायक संजय सरावगी ने मदरसों की तुलना संस्कृत महाविद्यालयों से नहीं करनी चाहिए. उन्‍होंने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय एक स्‍वायत्‍तशासी संस्‍था है. उसमें अपना सिनेट है और सिंडीकेट है. संस्कृत विश्वविद्यालय में क्‍या होगा उसके नियम क्या तय किए जाएंगे वो संस्था तय करती है. वहीं उर्दू स्कूल राज्‍य सरकार चलाती है. यहां राज्‍य में लागू किए जाने वाले ही नियम लागू होंगे.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें