भारतीय खाना सब्जियों के बिना अधूरी मानी जाती है. रोज के खाने में हरी-भरी सब्जियां न सिर्फ स्वाद बढ़ाती हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत जरूरी होती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो सब्जियां हम रोज बाजार से खरीदकर खाते हैं, वे वाकई कितनी सेफ हैं?हाल ही में बेंगलुरु और उसके आसपास के लोकल बाजारों से 72 तरह की सब्जियों के सैंपल लिए गए. इनमें से 19 सब्जियों में लेड नाम की जहरीली धातु पाई गई, जो सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक होती है.
यह रिपोर्ट सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की एक कमेटी ने 12 फरवरी 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सौंपी. ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि रिपोर्ट में क्या पाया गया, लेड सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाता है और इससे बचने के लिए क्या किया जा सकता है.
रिपोर्ट में क्या सामने आया?
सब्जियों के इन सैंपल्स की जांच फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) से मान्यता प्राप्त लैब में की गई. जांच में 11 तरह की भारी धातुएं, 3 मिनरल्स और 230 तरह के कीटनाशकों की मौजूदगी को परखा गया. जिन 19 सब्जियों में लेड तय सीमा से ज्यादा पाया गया, उनमें सबसे ज्यादा लेड बैंगन में मिला. इसके बाद लौकी जैसी सब्जियों में भी लेड की मात्रा ज्यादा थी. इसके अलावा बीन्स, चुकंदर, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, मिर्च, खीरा, सलूयोट पत्ते (जूट के पत्ते), गांठ गोभी और स्क्वैश में भी खतरनाक मात्रा में लेड पाया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंगन में लेड की मात्रा 1.953 mg/kg पाई गई, जबकि इसकी सेफ सीमा सिर्फ 0.1 mg/kg है. यानी बैंगन में तय सीमा से लगभघ 20 गुना ज्यादा लेड मौजूद था.
इस बारे में फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग, दिल्ली के सीनियर डॉक्टर विवेक जैन ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया कि अगर लेड मिट्टी या पानी के जरिए पौधे की जड़ों में चला जाए, तो वह सब्जी के अंदर तक पहुंच जाता है. ऐसे में सब्जी को धोने या छीलने से अंदर मौजूद लेड खत्म नहीं होता.
लेड के अलावा 70 सब्जियों के सैंपल में कीटनाशकों की भी जांच की गई, जिनमें से 10 सैंपल में कीटनाशकों की मात्रा तय सीमा से ज्यादा पाई गई. यह भी सेहत के लिए चिंता की बात है.
लेड इंसानों के लिए कितना खतरनाक है?
लेड इंसानों के लिए बेहद जहरीली धातु है. WHO के मुताबिक, साल 2021 में दुनियाभर में 15 लाख से ज्यादा मौतों की एक बड़ी वजह लेड के संपर्क में आना रहा. ज्यादातर मामलों में इससे दिल से जुड़ी बीमारियां हुईं. छोटे बच्चे लेड के असर से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. ज्यादा मात्रा में लेड शरीर में जाने से बच्चों का नर्वस सिस्टम खराब हो सकता है, जिससे उनकी समझने की क्षमता कम हो सकती है.
डॉक्टर विवेक जैन के मुताबिक, लेड की कोई सेफ मात्रा नहीं होती. कई बार बच्चों में इसके कोई साफ लक्षण नहीं दिखते. शरीर में लेड की ज्यादा मात्रा का पता सिर्फ ब्लड टेस्ट से ही चल सकता है.
यह कोई नया मामला नहीं है
आपको बात दें कि यह समस्या नई नहीं है. पिछले दो साल से इस पर काम चल रहा है. अक्टूबर 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेंगलुरु की सब्जियों में भारी धातुओं की मौजूदगी से जुड़ी एक रिपोर्ट पर खुद एक्सन लिया था. यह स्टडी एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट एंड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (EMPRI) ने की थी. इसके बाद NGT ने सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) को सब्जियों में भारी धातुओं और कीटनाशकों की जांच करने के निर्देश दिए.
हम खुद को कैसे सेफ रख सकते हैं?
डॉ. जैन के मुताबिक, सब्जियां खरीदने के बाद उन्हें अच्छी तरह धोने से ऊपर लगी गंदगी और कुछ हानिकारक कंपाउंड हट सकते हैं. इसके अलावा बच्चों को बैलेंस डाइट देना चाहिए, जिसमें आयरन, कैल्शियम और विटामिन C भरपूर मात्रा में हो क्योंकि इससे शरीर में लेड के असर को कम करने में मदद मिलती है. साथ ही, इस तरह की समस्या से बचने के लिए समय पर जांच बहुत जरूरी है.