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नींद पूरी न करने वाले हो जाते हैं भुलक्कड़! डॉक्टर ने बताया क‍ितने घंटे सोना बहुत जरूरी

रात में कम सोना दिमाग की सेहत पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है. सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. संजय मनचंदा के अनुसार, खराब नींद से दिमाग में बदलाव होते हैं जो अल्जाइमर यानी भूलने की बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं.

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इतने घंटे सोना जरूरी
इतने घंटे सोना जरूरी

रात में देर तक जागना आजकल आम बात हो गई है. लेकिन लगातार खराब नींद का असर हमारे दिमाग और याददाश्त पर भी पड़ सकता है. कुछ रिसर्च में खराब नींद की वजह से भूलने की बीमारी होने की बात कही गई है. डॉक्टर भी मानते हैं कि अच्छी नींद दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है. दिमाग के लिए कितने घंटे की नींद जरूरी है और कम सोने से ब्रेन पर क्या असर पड़ता है इस बारे में डॉक्टर से जानते हैं. 

सर गंगाराम अस्पताल में स्लीप मेडिसिन विभाग में चेयरपर्सन  डॉ. संजय मनचंदा ने इस बारे में Aajtak.in को बताया है. वह बताते हैं कि नींद और भूलने की बीमारी यानी अल्जाइमर का संबंध दोनों तरफ से हो सकता है. मतलब, लंबे समय तक नींद खराब रहने से दिमाग में कुछ ऐसे बदलाव हो सकते हैं, जो आगे चलकर अल्जाइमर का खतरा बढ़ा सकते हैं. वहीं, अल्जाइमर के शुरुआती बदलाव भी व्यक्ति की नींद खराब कर सकते हैं.

कम सोने से भूलने की बीमारी का क्या है संबंध

जब हम सोते हैं तो दिमाग में जमा कुछ बेकार चीजों को बाहर निकालने का काम ज्यादा तेजी से होता है. अगर कोई व्यक्ति लगातार कम सोता है या उसकी नींद बार-बार टूटती है, तो दिमाग की यह सफाई ठीक से नहीं हो पाती इससे दिमाग में एक खास प्रोटीन भी कम बनने लगता है. डॉ मनचंदा बताते हैं कि सोते समय गहरी नींद आना भी जरूरी है. ऐसा नहीं है कि बस आप लेटे हुए हैं. अगर केवल लेटे हुए हैं और नींद नहीं आ रही है तो इसका कोई फायदा नहीं है. 

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कितने घंटे की नींद है जरूरी

डॉ मनचंदा ने बताया कि 7 से 8 घंटे की नींद जरूरी है. इससे आपके दिमाग को आराम मिलता है और याददाश्त को मजबूत करने में मदद मिलती है. अगर आप केवल 4 से 5 घंटे सोते हैं तो इससे ब्रेन के फंक्शन पर असर पड़ता है. हालांकि नींद की बीमारी का इलाज करने से अल्जाइमर को रोका जा सकता है या नहीं, इस पर अभी और बड़ी रिसर्च की जरूरत है. लेकिन एक बात साफ है कि लगातार खराब नींद को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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किनको ज्यादा खतरा

जो लोग रोज केवल 4 से 5 घंटे की नींद लेते हैं तो इससे उनके ब्रेन पर असर पड़ सकता है. इससे अल्जाइमर का रिस्क हो सकता है, हालांकि ये जरूरी नहीं है कि ऐसे लोगों को अल्जाइमर हो ही जाएगा, लेकिन फिर भी ये जरूरी है कि अगर आपकी नींद कम है या आप सही तरीके से सो नहीं पा रहे हैं तो इस मामले में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. 

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