कॉमेडियन समय रैना अक्सर अपने डार्क ह्यूमर और के लिए खबरों में बने रहते हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर करीब 1 साल एक वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होने विवाद के बाद की मेंटल हेल्थ की भी चर्चा की. समय ने खुलासा किया कि जब उन पर एफआईआर हुई थी तो वे 'साइकोसिस' (Psychosis) नाम की मानसिक स्थिति से गुजरे थे. समय ने वीडियो में कहा, 'पॉलिटिशियंस मेरे अगेंस्ट हैं. उनके फैंस अब मेरे खिलाफ हो गए हैं. वो मीम्स बना-बनाकर मुझे ट्रोल कर रहे हैं. मुझे ऐसा लगने लगा है कि मैं किसी सपने में हूं. ये असली दुनिया नहीं है. ये सब एक सपना है. मुझे चीजें दिखाई दे रही हैं और मैं ये समझ नहीं पा रहा हूं कि वो सच हैं या नहीं. मैं उन्हें छूकर देख रहा हूं कि क्या वो असली हैं. क्या मैं किसी सपने में हूं? ये क्या हो रहा है? ये रहने के लिए सबसे बुरी मानसिक स्थिति है. इसे 'साइकोसिस' (Psychosis) कहते हैं.'
यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें इंसान हकीकत को छोड़ अपने दिमाग में काल्पनिक दुनिया बनाने लगता है. आखिर ये स्थिति क्या होती है, इसके लक्षण क्या होते हैं और इससे कैसे निपटा जा सकता है, इस बारे में जानेंगे.
बेंगलुरु के एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल के साइकोलॉजिस्ट डॉ. शारधी सी के मुताबिक, साइकोसिस कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि एक मानसिक स्थिति या सिंड्रोम है. इसमें व्यक्ति का दिमाग वास्तविकता यानी सच से संपर्क टूट जाता है और उसे ये पता नहीं होता कि क्या सच है और क्या झूठ.
आसान भाषा में कहें तो पीड़ित व्यक्ति ऐसी चीजें देखने, सुनने या महसूस करने लगता है जिनका अस्तित्व ही नहीं होता. इसे डॉक्टरी भाषा में डिल्यूजन (भ्रम) और हलुसिनेशन (मतिभ्रम) कहा जाता है.
समय रैना के मामले में एफआईआर के स्ट्रेस ने उनके दिमाग पर इतना गहरा असर डाला कि उन्हें हर छोटी बात में साजिश और खतरा नजर आने लगा था. साइकोसिस में इंसान को लगता है कि पूरी दुनिया उसके खिलाफ है या उसे कोई नुकसान पहुंचाना चाहता है.
साइकोसिस के मुख्य लक्षण 2 होते हैं और यही इस स्थिति को गंभीर बनाते हैं. पहला होता है डिल्यूजन, जिसमें व्यक्ति को ऐसी बातों पर यकीन हो जाता है जो होती ही नहीं हैं.
दूसरा है हलुसिनेशन, जिसमें व्यक्ति को आवाजें सुनाई देती हैं या ऐसी चीजें दिखती हैं जो होती ही नहीं हैं. इसके अलावा साइकोसिस से पीड़ित व्यक्ति के सोचने का तरीका पूरी तरह बदल जाता है. वह उलझी हुई बातें करने लगता है और उसकी फीलिंग्स पर उसका कंट्रोल भी नहीं रहता.ृ
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अधिक स्ट्रेस, नींद की कमी या किसी बड़ी दुर्घटना का सदमा साइकोसिस को ट्रिगर कर सकता है. समय रैना के मामले में, कानूनी कार्रवाई और सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग ने उनके दिमाग में स्ट्रेस पैदा किया था.
जब दिमाग इस तरह के स्ट्रेस को झेलने में असमर्थ हो जाता है तो वह वास्तविकता से बचने के लिए अपनी एक अलग दुनिया बना लेता है. समय ने साझा किया कि उस दौरान उन्हें लगने लगा था कि उनकी हर हरकत पर नजर रखी जा रही है.
वैसे तो साइकोसिस का इलाज मुमकिन है लेकिन इसके लिए समय पर डॉक्टरी सलाह और थेरेपी बहुत जरूरी है. इसमें आमतौर पर एंटी-साइकोटिक दवाओं का सहारा लिया जाता है ताकि दिमाग के कैमिकल को बैलेंस किया जा सके. इसके अलावा कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) मरीज को हकीकत और भ्रम के बीच अंतर समझाने में मदद करती है.