केंद्र सरकार ने दवाओं की कीमतों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानी एनपीपीए ने 39 नई दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत तय कर दी है. यह आदेश ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर 2013 के तहत जारी किया गया है.
इसमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, इंफेक्शन, आंखों की बीमारी, सांस की तकलीफ और कैंसर जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं.
यह नोटिफिकेशन 8 जुलाई को जारी हुआ. इस लिस्ट में जिन दवाओं के दाम तय किए गए हैं उनमें टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन, विटामिन डी3 का ओरल सॉल्यूशन, इमैटिनिब ओरल सॉल्यूशन, एम्पाग्लिफ्लोजिन से जुड़ी कॉम्बिनेशन दवाएं, टेल्मिसार्टन कॉम्बिनेशन, एस्पिरिन और एटोरवास्टेटिन वाले कैप्सूल तथा क्लोपिडोग्रेल कॉम्बिनेशन दवाएं शामिल हैं.
एनपीपीए के इस आदेश के मुताबिक, अब कोई भी दवा कंपनी इन दवाओं को तय की गई अधिकतम कीमत से ज्यादा दाम पर नहीं बेच सकेगी. सभी कंपनियों को अपने डीलरों और राज्यों के ड्रग रेगुलेटर को नई कीमत की जानकारी देनी होगी और अपडेटेड प्राइस लिस्ट भेजनी होगी. यानी दुकानों और अस्पतालों तक भी यह जानकारी पहुंचानी जरूरी होगी ताकि मरीजों को सही दाम पर दवा मिल सके.
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आदेश में यह भी साफ किया गया है कि कंपनियां दवा की कीमत में जीएसटी सिर्फ तभी जोड़ सकती हैं जब वह जीएसटी सरकार को असल में चुकाया गया हो या चुकाया जाना तय हो. मनमाने ढंग से जीएसटी जोड़कर दाम बढ़ाने की छूट नहीं है.
एनपीपीए ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई कंपनी तय कीमत से ज्यादा दाम वसूलती है तो उसे वह अतिरिक्त रकम ब्याज सहित वापस करनी होगी. यह कार्रवाई ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर और एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत की जाएगी. सरकार का मकसद है कि जरूरी दवाएं आम लोगों को उचित दाम पर मिल सकें और कोई भी कंपनी मरीजों से मनमानी कीमत न वसूल सके.