scorecardresearch
 

भारतीयों को हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा! कम उम्र में ही कंट्रोल करें कोलेस्ट्रॉल, नई AHA गाइडलाइंस

दिल की बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए AHA और ACC ने नई कोलेस्ट्रॉल गाइडलाइंस जारी की हैं. अब 9 साल की उम्र से स्क्रीनिंग और LDL लेवल को 55 mg/dL तक लाने पर जोर दिया गया है. जानें कैसे नया प्रिवेंट कैलकुलेटर और बेहतर लाइफस्टाइल आपको हार्ट अटैक से बचा सकते हैं.

Advertisement
X
तली-भूनी चीजों को कम खाना सही होता है. (PHOTO: ITG)
तली-भूनी चीजों को कम खाना सही होता है. (PHOTO: ITG)

New AHA Guidelines For Cholesterol Care: आजकल दिल की बीमारियां सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब खान-पान और बढ़ता स्ट्रेस दिल पर धीरे-धीरे असर डालते हैं, जो अक्सर देरी से लोगों को फील होता है. इसी बदलती हकीकत को देखते हुए अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC) और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) की नई गाइडलाइंस ने कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट को लेकर बड़ा बदलाव किया है.

नई गाइडलाइंस एक साफ मैसेज देती हैं कि अगर दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखना है, तो कोलेस्ट्रॉल का ध्यान अभी से रखना होगा, बाद में नहीं. दिल की बीमारी से बचने के लिए समय रहते यानी कम उम्र से ही कदम उठाए जाएं. पहले जहां इलाज तब शुरू होता था जब समस्या बढ़ जाती थी, अब डॉक्टर शुरुआत में ही जोखिम पहचानकर रोकथाम पर ध्यान देंगे.

कोलेस्ट्रॉल का रखें ध्यान

कोलेस्ट्रॉल, खासकर LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल), धीरे-धीरे हमारी नसों में जमा होकर उन्हें संकरा कर देता है. इसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बन सकता है. नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अब सिर्फ कुछ सालों का जोखिम नहीं बल्कि पूरी जिंदगी का खतरा देखा जाएगा, जिससे समय रहते सही फैसला लिया जा सके.

क्या करता है प्रिवेंट कैलकुलेटर टूल

इस बार एक नया टूल प्रिवेंट कैलकुलेटर पेश किया गया है, जो आपकी उम्र, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और स्मोकिंग जैसी आदतों के आधार पर आने वाले 10 और 30 साल में दिल की बीमारी का खतरा बताता है. यह पहले के मुकाबले ज्यादा सटीक माना जाता है, इसके जरिए लोगों को लो, बॉर्डरलाइन, इंटरमीडिएट और हाई रिस्क कैटेगरी में रखा जाता है.

Advertisement

अगर रिपोर्ट से पूरी तस्वीर साफ नहीं होती, तो डॉक्टर CAC स्कैन या Lp(a), apoB जैसे टेस्ट भी करवा सकते हैं, इससे छिपे हुए खतरे का समय रहते पता लगाकर सही इलाज और बचाव शुरू किया जा सकता है. 

नई गाइडलाइंस के अनुसार LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) को एक तय सीमा में रखना जरूरी है. अगर आपका खतरा सामान्य है, तो LDL 100 mg/dL से कम होना चाहिए. जिन लोगों में खतरा ज्यादा है, उनके लिए इसे 70 से नीचे रखना जरूरी है. वहीं, जिनको पहले हार्ट अटैक हो चुका है या बहुत ज्यादा जोखिम है, उनके लिए LDL 55 mg/dL से भी कम होना चाहिए, ताकि दिल सुरक्षित रहे.

खराब कोलेस्ट्रॉल के लिए दवाइयां

इलाज की शुरुआत आमतौर पर स्टैटिन दवाओं से की जाती है, जो LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में काफी असरदार होती हैं. अगर इससे असर नहीं होता, तो डॉक्टर इजेटिमाइब (Ezetimibe), पीसीएसके9 इनहिबिटर्स (PCSK9 inhibitors), बेम्पेडोइक एसिड (Bempedoic acid) या इन्क्लिसिरान (Inclisiran) जैसी दवाएं भी दे सकते हैं, ताकि कोलेस्ट्रॉल को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सके.

बच्चों और युवाओं पर खास फोकस

इस गाइडलाइन की खास बात यह है कि अब बच्चों और युवाओं पर भी ध्यान दिया गया है. 9 से 11 साल के बच्चों का कोलेस्ट्रॉल चेक करने की सलाह दी गई है, खासकर अगर परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास हो. इससे भविष्य में होने वाली दिल की बीमारियों को पहले ही रोका जा सकता है.

Advertisement

खराब कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए खाएं ये चीजें

हालांकि, दवाओं से ज्यादा अहम लाइफस्टाइल है. हेल्दी डाइट (हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज), नियमित एक्सरसाइज (हफ्ते में कम से कम 150 मिनट), वजन कंट्रोल, स्मोकिंग से दूरी और अच्छी नींद,ये सभी आदतें LDL को 10 से 30 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं.

दवाइयों, सही डाइट और लाइफस्टाइल के साथ कुछ लोगों को खास सावधानी रखने की जरूरत होती है. जैसे जिन लोगों को डायबिटीज या किडनी की बीमारी है, या जो साउथ एशियन (भारतीय) मूल के हैं.

इनमें दिल की बीमारी का खतरा ज्यादा होता है. इसलिए ऐसे लोगों को नियमित जांच करवानी चाहिए और समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहना जरूरी है, ताकि खतरे को पहले ही रोका जा सके.

 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement