मोटापे की समस्या अब काफी आम हो गई है और ज्यादातर लोग इससे जूझ रहे हैं. बच्चे से लेकर बड़ा हर कोई मोटापे का शिकार हो रहा है, जिसकी सबसे बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान है. शरीर में चर्बी तो जल्दी जमा हो जाती है, मगर उसे कम करना उतना ही मुश्किल होता है. हमारी बॉडी में दो तरह की चर्बी होती है, एक व्हाइट और दूसरा ब्राउन फैट होता है.
व्हाइट फैट एक्स्ट्रा एनर्जी को जमा करता है, जिससे मोटापा बढ़ सकता है. वहीं, ब्राउन फैट एनर्जी को स्टोर करने के बजाय उसे जलाकर शरीर को गर्म रखने में मदद करता है, इस प्रोसेस को थर्मोजेनेसिस कहा जाता है. हाल ही में ब्राउन फैट के बर्निंग प्रोसेस को लेकर हुई नई रिसर्च मोटापे के इलाज के लिए एक नई दिशा दिखा सकती है.
नेचर कम्युनिकेशंस (Nature Communications) में पब्लिश हुई एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है कि हमारा शरीर किस तरह ब्राउन फैट का इस्तेमाल करके एनर्जी को जलाता है और उसे गर्मी में बदल देता है.
इस नए रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक खास प्रोटीन SLIT3 की भूमिका को समझा, यह प्रोटीन दो हिस्सों में बंट जाता है और दोनों हिस्से अलग-अलग काम करते हैं. एक हिस्सा ब्लड वेसल्स की ग्रोथ में मदद करता है, जबकि दूसरा हिस्सा नसों के नेटवर्क को विकसित करता है. ये दोनों चीजें ब्राउन फैट के सही तरीके से काम करने के लिए बहुत जरूरी हैं.
जब शरीर को ठंड लगती है, तब ब्राउन फैट एक्टिव हो जाता है. नसें इसे दिमाग से संकेत देती हैं और खून की नलिकाएं ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाती हैं. इसके बाद ब्राउन फैट तेजी से ग्लूकोज और फैट को जलाकर गर्मी पैदा करता है, इससे शरीर में अधिक एनर्जी जमा नहीं होती.
इस रिसर्च में यह भी पाया गया कि BMP1 नाम का एक एंजाइम SLIT3 को दो भागों में काटता है और PLXNA1 नाम का रिसेप्टर नसों के विकास में मदद करता है. जब वैज्ञानिकों ने इन तत्वों को हटाया, तो चूहों में ठंड सहने की शक्ति कम हो गई और उनका ब्राउन फैट ठीक से काम नहीं कर पाया.
मानव शरीर पर किए गए स्टडी में भी यह संकेत मिला कि SLIT3 का कनेक्शन मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस से हो सकता है. इसका मतलब है कि यह प्रोटीन हमारे मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है. अभी तक ज्यादातर वजन घटाने की दवाएं भूख कम करने पर काम करती हैं. लेकिन यह नई रिसर्च बताती है कि अगर हम ब्राउन फैट को ज्यादा एक्टिव कर सकें, तो शरीर खुद ज्यादा कैलोरी जलाने लगेगा.
रिसर्च यह साफ हो गया है कि बॉडी में सिर्फ ब्राउन फैट होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके अंदर सही नेटवर्क होना भी जरूरी है. भविष्य में इसी आधार पर मोटापे के नए और असरदार इलाज विकसित किए जा सकते हैं.