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जन्म से टेढ़ी हो चुकी रीढ़ की हड्डी का हो सकेगा सफल इलाज, AIIMS के डॉक्टरों की ये तकनीक मिली कारगर

Congenital scoliosis Treatment : दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों ने कंजेनिटल स्कोलियोसिस वाले बच्चों पर Hi-POAD तकनीक की मदद से सर्जरी कर इलाज में सफलता पाई है. इसको लेकर एक रिसर्च की गई थी, जिसको यूरोपियन स्पाइन जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

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 कंजेनिटल स्कोलियोसिस का इलाज
कंजेनिटल स्कोलियोसिस का इलाज

कुछ बच्चों में जन्म के साथ ही रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होती है. इसको कंजेनिटल स्कोलियोसिस कहते हैं. मां के गर्भ में बच्चे को यह समस्या हो जाती है. इसका सही इलाज काफी मुश्किल माना जाता है, लेकिन अब बेहतर ट्रीटमेंट को लेकर उम्मीद जगी है. दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों ने कंजेनिटल स्कोलियोसिस वाले बच्चों पर एक स्टडी की है. इसमें पता चला है कि Hi-POAD तकनीक की मदद से सर्जरी करके इसको ठीक किया जा सकता है. 

एम्स की इस रिसर्च को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल यूरोपियन स्पाइन जर्नल में प्रकाशित किया गया है. AIIMS नई दिल्ली में डिपार्टमेंट ऑफ आर्थोपेडिक्स में प्रोफेसर डॉ. भावुक गर्ग और डॉ. आकाशदीप सिंह ने इस स्टडी को किया है.

क्या होती है कंजेनिटल स्कोलियोसिस 

AIIMS नई दिल्ली में डिपार्टमेंट ऑफ आर्थोपेडिक्स में प्रोफेसर डॉ. भावुक गर्ग ने इस बारे में Aajtak.in को बताया है. डॉ भावुक कहते हैं कि कुछ बच्चों में रीढ़ की हड्डी जन्म के साथ ही टेढ़ी हो जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मां के गर्भ में ही रीढ़ की कुछ हड्डियां गलत तरीके से बन जाती हैं. इससे रीढ़ का सामान्य तरीके से विकास नहीं हो पाता है. यह समस्या जेनेटिक कारणों से हो सकती है. हर 10 हजार बच्चों में से 1 को यह हो सकती है. इसमें जन्म के साथ ही बच्चे का पोश्चर एक तरफ को झुक जाता है. चिंता की बात यह है कि इस समस्या के कारण शरीर के कई दूसरे अंगों पर भी असर पड़ता है. यह हार्ट, किडनी को भी नुकसान करती है. कुछ बच्चों में सांस लेने में परेशानी भी हो जाती है. 

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कंजेनिटल स्कोलियोसिस के लक्षण क्या होते हैं 

बच्चे की पसलियां एक तरफ ज़्यादा साफ दिखना

कमर का एक जैसा न होना

एक कूल्हे का दूसरे से ऊंचा दिखना

शरीर एक तरफ झुका हुआ दिखना

कंजेनिटल स्कोलियोसिस पर हुई स्टडी में क्या पता चला

इस स्टडी को करने का मकसद यह जानना था कि क्या Hi-PoAD तकनीक कंजेनिटल स्कोलियोसिस वाले बच्चों पर कारगर है या नहीं. इस तकनीक में रीढ़ में ज्यादा संख्या में स्क्रू लगाए जाते हैं. हड्डी के कुछ हिस्सों को काटकर रीढ़ को लचीला बनाया जाता है. टेढ़ी हुई रीढ़ की हड्डी को घुमाकर सही दिशा में लाने की कोशिश की जाती है. इस तरह से यह सर्जरी पूरी होती है. 

डॉ भावुक ने बताया कि जब एम्स में आए बच्चों के इलाज के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया तो बेहतर परिणाम मिले. स्पाइन में काफी सुधार आया और कम समस्याएं देखने को मिली. रिसर्च में यह पता चला कि जन्मजात टेढ़ी रीढ़ वाले चुनिंदा मरीजों के लिए यह तकनीक एक बेहतर विकल्प बन सकती है.
 
 Hi-POAD तकनीक काफी कारगर

डॉ भावुक ने बताया कि पहले कंजेनिटल स्कोलियोसिस वाले बच्चों में सर्जरी काफी मुश्किल मानी जाती थी. सर्जरी में नसों को नुकसान होने का रिस्क रहता था. लेकिन अब  Hi-POAD तकनीक से की गई सर्जरी से यह साफ हो गया है कि इस तकनीक से बेहतर इलाज किया जा सकता है. हालांकि इस स्टडी को अभी बड़े पैमाने पर किए जाने की जरूरत है. 

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