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रहमान डकैत से भी ज्यादा बेरहम: मैक्सिकन ड्रग माफिया के टॉर्चर के किस्से जो किसी की भी रूह कंपा दें

लेकिन मैक्सिको के इतिहास के सबसे बेरहम ड्रग तस्करों में से एक, सैंटियागो मेजा लोपेज इस नाम से क्यों कुख्यात हुआ ये जानकर कहीं आप सूप पीना ही न छोड़ दें.

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रहमान डकैत से भी ज्यादा बेरहम: मैक्सिकन ड्रग माफिया के टॉर्चर के किस्से जो किसी की भी रूह कंपा दें
रहमान डकैत से भी ज्यादा बेरहम: मैक्सिकन ड्रग माफिया के टॉर्चर के किस्से जो किसी की भी रूह कंपा दें

“धुरंधर” फिल्म में कराची के अंडरवर्ल्ड को जिस तरह से पेश किया गया, उसने लोगों को हिलाकर रख दिया. एक ऐसी दुनिया जो क्रूर है, बेरहम है और जहां दहशत का सिक्का चलता है. 

लेकिन जब आप मैक्सिको और कोलंबिया के  ड्रग माफिया के दहशत और क्रूरता की दास्तान सुनेंगे तो आपको लगेगा कि रहमान डकैत भी मैक्सिको के ड्रग माफिया ‘एल मेंचो’ के मुकाबले कहीं नहीं टिकता. एल मेंचो, जिसका पूरा नाम था नेमेसियो रूबेन ओसेगुएरा सर्वेंटेस, उसे 22 फरवरी को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था.

एल मेंचो, मैक्सिको के ताकतवर ड्रग कार्टेल जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल (CJNG) का डॉन था. अब इस गैंग के गुंडे अपने सरगना की मौत का बदला लेने के लिए मैक्सिको की सड़को पर कोहराम मचाए हुए हैं.

एल मेंचो का CJNG गिरोह बेहद क्रूर हिंसा के लिए बदनाम रहा है. 2019 में इस गैंग ने 19 लोगों को मार डाला और उनके शवों को क्षत-विक्षत कर दिया. इसके बाद उसके गुंडों ने उनमें से नौ शवों को अर्ध-नग्न हालत में एक पुल पर लटका दिया और एक संदेश छोड़ गए जिसमें लिखा था - “प्यारे लोगों, अपना काम करते रहो.”

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सच्चाई तो ये है कि मैक्सिको के ड्रग कार्टेल्स अपनी हैवानियत के लिए दुनियाभर में बदनाम हैं. खासतौर पर अपने दुश्मनों और मुखबिरों को सबक सिखाने के लिए इन गुंडों ने टॉर्चर और हत्या के कई हैरतअंगेज और डरावने तरीके आजमाए हैं जिसकी असली तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर मौजूद तो हैं पर हम आपको दिखा नहीं सकते.

द स्टूमेकर

“द स्टूमेकर” नाम सुनकर आपके दिमाग में क्या ख्याल आता है? किसी रेस्त्रां में सूप बना कर परोसने वाला कोई बूढ़ा आदमी..

लेकिन मैक्सिको के इतिहास के सबसे बेरहम ड्रग तस्करों में से एक, सैंटियागो मेजा लोपेज इस नाम से क्यों कुख्यात हुआ ये जानकर कहीं आप सूप पीना ही न छोड़ दें.

माना जाता है कि लोपेज ने करीब 300 लोगों को कॉस्टिक सोडा (तेजाब जैसा केमिकल) के अंदर गला कर मार डाला था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वो लाशों को कॉस्टिक सोडा से भरे ड्रम में डालकर तब तक उबालता था जब तक लाशें, कीचड़नुमा गाढ़े लिक्विड में न बदल जाएं. यानि इंसानी लाशों का सूप!

2010 में गिरफ्तार होने के बाद, लोपेज ने कुबूल किया था कि वो लाशों को एसिड और सोडियम हाइड्रॉक्साइड से भरे टब में डुबोता था और उन्हें घंटों तक ‘हिलाता’ था, जब तक कि दांत, नाखून और कुछ हड्डियों के टुकड़ों को छोड़कर बाकी सबकुछ इसमें घुल न जाए.

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शिकारी खुद यहां शिकार बन गया

अगर इन कार्टेल के ट्रेनिंग “स्कूलों” के बारे में छपीं रिपोर्ट्स पर यकीन किया जाए, तो वहां बेरहमी की कोई सीमा नहीं है. कुछ भी मुमकिन है. यहां तक कि अपने लोगों को जानवरों से बदतर हिंसक बनाने के लिए इंसानी मांस खिलाना भी.

द सन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एल मेंचो के गिरोह CJNG ने अपने नए सदस्यों का डर खत्म करने और विरोध में उठे सुर को दबाने के लिए Cannibalism का भी इस्तेमाल किया. विरोधी गुट के आदमी की पहले निर्मम तरीके से यातना देकर हत्या की गई और फिर अपने गिरोह के नए सदस्यों को इंसानी मांस और इंसान का दिल निकाल कर खाने के लिए मजबूर किया गया.

गिरोह के चंगुल से जान बचाकर भागने वाले एक आदमी ने बताया कि कैसे एक डरपोक नए सदस्य को अपने दुश्मन का सिर काटने और फिर पत्थर से उसे कुचलने का ऑर्डर दिया गया था. एक और आदमी जिसे इंसानी मांस खाते समय उल्टी हो गई थी, उसे मजबूर किया गया कि वो उस बचे हुए मांस को दोबारा उठाकर खाए. मकसद ये कि उसके दिमाग से डर और दया हमेशा के लिए खत्म हो जाए.

 मैडमैन ने दी सिरकटी लाशों से चेतावनी

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ड्रग गैंग्स की दुनिया में सजा देने के लिए सिर काट देना एक आम बात है. ABC न्यूज की 2012 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 'गल्फ गैंग' ने 'जेटास' (Zetas) गैंग के कम से कम तीन सदस्यों से पूछताछ की और फिर उनके सिर काट दिए. खास बात ये है कि जिन लोगों के सिर काट डाले गए वो पहले इसी 'गल्फ गैंग' के लिए काम कर चुके थे. लेकिन जब इन दोनों कार्टेल के बीच जंग शुरू हुई, तब से सिर काटना, फांसी पर लटकाना और टार्चर करना आम बात हो गई.

वैसे 'जेटास' भी अपनी क्रूरता और बेरहमी के लिए कम बदनाम नहीं हैं.

2012 में एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसमें 49 प्रवासी मजदूरों की सिर कटी हुई लाशें एक हाईवे पर फेंक दी गई थीं. कहा जाता है कि 'जेटास' गैंग के सदस्यों ने दूसरे गैंग्स को चेतावनी देने के लिए ऐसा किया था. चेतावनी में उन्होंने कहा: "गल्फ कार्टेल, सिनालोआ कार्टेल, नौसेना या सेना, कोई भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता, वरना उनका यही अंजाम होगा." बताया जाता है कि इसके पीछे 'जेटास' का एक लीडर डेनियल एलिजोंडो रामिरेज था, जिसे "द मैडमैन" (पागल आदमी) के नाम से भी जाना जाता था.

हथौड़े से खूनी मुकाबला

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'जेटास' ड्रग कार्टेल खौफनाक हत्याओं के लिए पहले से ही बदनाम था. फिर उनके शैतानी दिमाग ने एक और भी जानलेवा मुकाबले का ईजाद किया. 

'द टाइम्स' की 2011 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्टेल ने 'ग्लेडिएटर' (पुराने जमाने के योद्धाओं) की तरह मुकाबले करवाए. इसमें लोगों को आपस में तब तक लड़ने के लिए मजबूर किया जाता था जब तक कि कोई एक मर न जाए. लड़ने के लिए उनके पास  हथियार के नाम पर केवल हथौड़े, बड़ा छुरा होता था.

जो भी इस खूनी खेल में बच जाता था, उसे कार्टेल में रख लिया जाता था - दूसरे लोगों की हत्या करवाने के लिए. ऐसी हत्याओं से जुड़ी ऐसी जगह मिली थी जहां 400 से ज्यादा लोगों को दफन किया गया था.

खौफनाक फुटबॉल 

आमतौर पर फुटबॉल को किसी हिंसा या डर से जोड़कर नहीं देखा जाता, लेकिन मैक्सिको के 'ड्रग वॉर्स' में कुछ भी संभव है. 2010 में एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना हुई, जिसमें एक आदमी के चेहरे की खाल उतारकर उसे एक फुटबॉल के ऊपर सिल दिया गया था. माना जाता है कि ये खौफनाक हरकत 'जुआरेज' ड्रग गैंग के सदस्यों को धमकी देने के लिए की गई थी.

'द इंडिपेंडेंट' की 2016 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जूलियो सेसर मोंड्रैगन नाम के एक आदमी की लाश मिली जिसे वीभत्स तरीके से मारा गया था. उसकी आंखें निकाल ली गई थीं और उसके चेहरे की खाल इस तरह उधेड़ दी गई थी कि सिर्फ खोपड़ी बची थी. इस खौफनाक जुर्म को 'गुएरेरोस यूनिडोस' नाम के एक मैक्सिकन क्राइम गैंग ने अंजाम दिया था.

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