राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर एक सीसीटीवी वीडियो वायरल हो गया है. ये देखने में किसी मंदिर का वीडियो लग रहा है, जिसमें कुछ लोग नोटों को गिन रहे हैं. इसमें कुछ लोग नोटो की गड्डियां छुपा कर दूसरे कमरे में ले जाते भी दिखते हैं. कई सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि ये अयोध्या के राम मंदिर में दान के पैसों की चोरी का वीडियो है.
गौरतलब है कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल यानी SIT ने बीते दो दिनों के अंदर कुल 19 घंटे तक मंदिर परिसर के भीतर रहकर गहन पड़ताल की है. अब तक की जांच में नौ ऐसे कर्मचारी मिले हैं जिन्होंने हाल ही में महंगे फोन और गाड़ियां खरीदी हैं.
इसी संदर्भ में वायरल हो रहे सीसीटीवी फुटेज को शेयर करते हुए एक फेसबुक यूजर ने लिखा, "लो जी इतने दिन से हल्ला मचा था की राम मंदिर में हुए दान के पैसों की चोरी का मामला अब तो सीसीटीवी फुटेज भी वायरल हो गया है".
पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये अयोध्या के राम मंदिर का नहीं बल्कि कर्नाटक के एक मंदिर का वीडियो है, जो 2024 में सामने आया था.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने से हमें इंडिया टुडे की 30 सितंबर, 2024 की एक रिपोर्ट मिली. ये रिपोर्ट बेंगलुरु के गली अंजनेय स्वामी मंदिर में दान के पैसों की चोरी से संबंधित है. उस वक्त इस तरह के और भी कई वीडियो सामने आए थे जिसमें मंदिर के कर्मचारी दान के पैसों की चोरी करते दिख रहे थे. मामले को लेकर जुलाई, 2024 में एफआईआर हुई थी.
उस वक्त मंदिर के मुख्य पुजारी रामचंद्र ने दावा किया था कि ये घटना तकरीबन एक साल पुरानी थी. उन्होंने ये भी कहा था कि इस मामले में मंदिर की प्रशासनिक समिति के दो सदस्यों को निलंबित किया गया था और दो रसोइयों को भी हटाया गया था. बाद में कर्नाटक सरकार ने अव्यवस्था और अनियमितताओं का हवाला देते हुए इस मंदिर का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया था.
इस घटना के बारे में कर्नाटक के कई स्थानीय न्यूज आउटलेट्स ने भी खबर छापी थी.
राम मंदिर दान चोरी मामले में अब तक क्या हुआ है?
राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले को पूर्व यूपी सीएम अखिलेश यादव ने 7 जून को उठाया था जिसके बाद ये चर्चा में आ गया. 13 जून को सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया. उसी दिन इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया.
इस मामले को लेकर पुलिस के पास तीन शिकायतें पहुंची हैं, जिनमें से पहली धर्मसेना के संस्थापक अशोक दुबे की है, दूसरी यूपी युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला की और तीसरी करणी सेना की है. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक राम जन्मभूमि कोतवाली के एसएचओ ने कहा है कि पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज करने को लेकर किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है.