देश के तीन राज्यों में इस समय जमकर बवाल हो रहा है. ये वो तीन राज्य हैं, जहां अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव हैं. ये राज्य हैं- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान.
इनमें से मध्य प्रदेश में बीजेपी तो छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है. और यहां युवाओं ने सत्ताधारी पार्टी के लिए चुनौती खड़ी कर दी है.
छत्तीसगढ़ में हाल ही में युवाओं ने नग्न होकर प्रदर्शन किया था. उनकी मांग थी कि फर्जी जाति प्रमाण के जरिए सरकारी नौकरी पाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
वहीं, मध्य प्रदेश में पटवारी भर्ती परीक्षा में धांधली के आरोपों को लेकर बवाल मचा हुआ है. जबकि, राजस्थान में पेपर लीक का मुद्दा छाया हुआ है.
इन तीनों राज्यों में चुनाव से ऐन पहले इस तरह के मामले सामने आने और युवाओं के सड़क पर उतरने से सत्ताधारी पार्टी की चुनौती बढ़ गई है. ऐसे में जानते हैं कि इन राज्यों में क्यों और किस बात पर हो रहा है बवाल?
मध्य प्रदेशः पटवारी भर्ती घोटाला
- एमपी में इसी साल जनवरी में पटवारी भर्ती निकाली जाती है. इसके लिए मार्च में पेपर होते हैं.
- रिजल्ट आने के बाद बवाल तब शुरू हुआ, जब दावा किया गया कि टॉप करने वाले 10 में से 7 अभ्यर्थियों ने एक ही एग्जाम सेंटर में पेपर दिया था.
- इस बात पर शक तब और गहराया जब एग्जाम बोर्ड ने टॉपर्स की लिस्ट जारी नहीं की. छात्रों ने जब इसकी मांग की तब जाकर टॉपर्ट की लिस्ट जारी की, जिसमें ये बात पुख्ता हो गई.
- आरोपों के मुताबिक, टॉप-10 में से 7 टॉपर्स ने ग्वालियर के एनआरआई इंजीनियरिंग कॉलेज में बने सेंटर में एग्जाम दिया था. कांग्रेस का आरोप है कि ये कॉलेज बीजेपी नेता का है.
सरकार का एक्शनः सड़कों पर युवाओं के उतरने के बाद प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान ने इस कथित भर्ती घोटाले की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राजेंद्र कुमार वर्मा को सौंप दी है. सरकार को इससे जुड़ी रिपोर्ट 31 अगस्त तक सौंपी जाएगी.
युवा कितने असरदारः साल 2018 के चुनाव में वोटर्स की संख्या 5.07 करोड़ थी, जो 2023 तक बढ़कर 5.40 करोड़ पहुंच गई है. इसका मतलब पहली बार वोट डालने वाले युवाओं की संख्या 30 लाख से ज्यादा है.
छत्तीसगढ़ः पीएससी घोटाला
- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने 2021 सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे जून में जारी किए थे. नतीजों में बीजेपी ने भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए हैं. आरोप ये भी है कि सरकारी अफसरों के रिश्तेदारों के नाम सफल उम्मीदवारों की लिस्ट में हैं.
- इतना ही नहीं, हाल ही में राजधानी रायपुर में दर्जनभर युवाओं ने नग्न होकर प्रदर्शन किया था. उन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी पाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.
- इन प्रदर्शनकारियों का दावा था कि राज्य सरकार की जांच समिति ने पाया था कि 267 सरकारी कर्मचारियों ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया था, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.
सरकार का एक्शनः पीएससी परीक्षा को लेकर लगे आरोपों को लोक सेवा आयोग ने खारिज किया है. आयोग का दावा है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष थी. वहीं ये मामला हाईकोर्ट में भी है.
युवा कितने असरदारः 2018 के चुनाव में छत्तीसगढ़ में वोटर्स की संख्या 1.81 करोड़ के आसपास थी. 2023 तक इनकी संख्या 1.94 करोड़ से ज्यादा हो गई है. यानी, इस साल होने वाले चुनाव में 13 लाख से ज्यादा वोटर्स पहली बार वोट देंगे.
राजस्थानः पेपर लीक से परेशान सरकार
- राजस्थान में पेपर लीक को लेकर सियासत अक्सर गर्म रहती है. एक अनुमान के मुताबिक, राज्य में पिछले साढ़े चार साल में पेपर लीक के 10 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं.
- पिछले महीने ही राजस्थान लोक सेवा आयोग ने पेपर लीक के कारण ग्रुप-ए और ग्रुप-बी की सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया. इसका सामान्य ज्ञान का पेपर दिसंबर 2022 में हो चुका है, लेकिन पेपर लीक के कारण आयोग ने इसे निरस्त कर दिया. अब ये पेपर 30 जुलाई को होगा.
- राजस्थान में पेपर लीक के मामले इतने बढ़ते जा रहे हैं कि कांग्रेस को अंदरखाने से ही चुनौती मिलने लगी है. पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट कई मौकों पर बड़ी मछलियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर चुके हैं.
सरकार का एक्शनः पेपर लीक मामले में कई मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया जा चुका है. चर्चा है कि मॉनसून सत्र में पेपर लीक को लेकर कानून लाने जा रही है. इस कानून में पेपर लीक के दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान होगा.
युवा कितने असरदारः ऐसा माना जाता है कि गहलोत सरकार के अब तक के कार्यकाल के दौरान जितने पेपर लीक के मामले सामने आए, जिसकी वजह से 20 लाख से ज्यादा युवा प्रभावित हुए हैं. पांच साल में राज्य में करीब 25 लाख वोटर्स भी बढ़ गए हैं.