1988 में आई यह फिल्म भारतीय मिडिल क्लास परिवार में स्त्री और पुरुष के मध्य रिश्ते पर बनी है. महेंद्र एक बहुत ही कामयाब बिजनेसमैन है. वह अपने दादाजी का बहुत सम्मान करता है. महेंद्र की सगाई सुधा नाम की एक लड़की से होती है, और इस सगाई को 5 साल हो चुके होते हैं. लेकिन महेंद्र हमेशा शादी को टालता रहता है. एक दिन वह सुधा को बताता है कि उसका माया नाम की एक लड़की के साथ अफेयर है. महेंद्र माया के पास जब लौट के जाता है, तो उसे पता चलता है कि माया गायब है, उसका कोई अता पता नहीं है. माया सिर्फ अपनी कुछ कविताएं छोड़ जाती है. ऐसे में महेंद्र सुधा से शादी कर लेता है. लेकिन अचानक माया वापस आ जाती है और फिर महेंद्र की शादीशुदा जिंदगी उससे प्रभावित होने लगती है. माया को जब पता चलता है कि महेंद्र की शादी हो चुकी है, तो वो आत्महत्या करने की कोशिश करती है. इसे देखकर महेंद्र माया के साथ कुछ समय बिताता है. जब यह बात सुधा को पता चलती है कि महेंद्र माया के साथ है, तो वह महेंद्र पर विश्वासघात का आरोप लगाती है, और मानती है कि महेंद्र से शादी करना उनकी बहुत बड़ी भूल थी. इस फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह महेंद्र इन दोनों औरतों को साथ लेकर चलता है.